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भारत ने पेश किए 3 स्वदेशी AI मॉडल, दो बिना इंटरनेट के मोबाइल और लैपटॉप पर करेंगे काम

आज के समय में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ChatGPT और Gemini जैसे AI टूल्स से लोग पढ़ाई, ऑफिस के काम और कई दूसरी चीजों में मदद ले रहे हैं. लेकिन इनका इस्तेमाल करने के लिए आमतौर पर इंटरनेट की जरूरत पड़ती है. ऐसे में अगर इंटरनेट न हो, तो इनकी मदद लेना मुश्किल हो जाता है. इसी परेशानी को दूर करने की दिशा में भारत ने तीन स्वदेशी AI मॉडल पेश किए हैं. खास बात यह है कि इनमें से दो मॉडल मोबाइल और लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के भी काम कर सकते हैं.

इन तीनों AI मॉडल के नाम EKA-1, Dhīr 2B और Dhīr 5B हैं. इन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने IndiaAI Mission के तहत पेश किया है. इन्हें भारत में ही तैयार किया गया है और इनका मकसद देश की जरूरतों के हिसाब से AI तकनीक विकसित करना है. इनका इस्तेमाल सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, रिसर्च सेंटर और दूसरे संस्थानों में किया जा सकता है.

EKA-1 क्या है और यह कैसे करेगा काम?
EKA-1 इन तीनों मॉडल में सबसे बड़ा है. इसे बेंगलुरु की कंपनी Soket Labs ने तैयार किया है. इस AI मॉडल में 26.3 अरब पैरामीटर हैं और इसे करीब 7.5 ट्रिलियन टोकन के डेटा से ट्रेन किया गया है.

यह मॉडल गणित के मुश्किल सवाल हल करने, कोडिंग और तर्क से जुड़े सवालों के जवाब देने जैसे काम कर सकता है. इसके अलावा, इसे एक AI एजेंट के तौर पर भी तैयार किया गया है, यानी यह कई चरणों वाले काम करने में मदद कर सकता है.

भाषा के मामले में भी EKA-1 काफी उपयोगी है. यह अंग्रेजी के साथ भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को सपोर्ट करता है. इसे खास तौर पर बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

Dhīr 2B और Dhīr 5
Dhīr 2B और Dhīr 5B को बेंगलुरु की कंपनी ZenteiQ AiTech Innovations ने तैयार किया है. ये दोनों ओपन-सोर्स AI मॉडल हैं. इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें मोबाइल फोन और लैपटॉप जैसे डिवाइस पर डाउनलोड करके बिना इंटरनेट के भी चलाया जा सकता है.

आसान भाषा में समझें तो इनका इस्तेमाल करने के लिए हर बार इंटरनेट या किसी बड़े क्लाउड सर्वर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी. ये डिवाइस पर ही काम कर सकते हैं.

ये दोनों मॉडल दस्तावेजों में मौजूद जानकारी खोजने, जरूरी बातें निकालने और रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने में मदद कर सकते हैं. इन्हें अंग्रेजी के अलावा 10 भारतीय भाषाओं के लिए तैयार किया गया है. इनका इस्तेमाल सरकारी विभागों, शिक्षा, उद्योग और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है.

बिना इंटरनेट AI चलने का क्या होगा फायदा?
बिना इंटरनेट AI चलने का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जिनके इलाके में इंटरनेट कनेक्शन ठीक से काम नहीं करता. इसके अलावा, जिन संस्थानों को गोपनीय दस्तावेजों पर काम करना पड़ता है, उनके लिए भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है.

जब AI मॉडल सीधे डिवाइस पर काम करता है, तो जानकारी को हर बार बाहरी क्लाउड सर्वर पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे डेटा पर अपना नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

क्या ChatGPT और Gemini को देंगे टक्कर?
भारत के इन स्वदेशी AI मॉडल को देश की जरूरतों और भारतीय भाषाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. हालांकि, इनकी तुलना सीधे ChatGPT और Gemini से करना अभी जल्दबाजी होगी. तीनों मॉडल की क्षमताएं और इस्तेमाल के तरीके अलग-अलग हैं.

फिलहाल इनकी लॉन्चिंग को भारत में अपनी AI तकनीक विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. आने वाले समय में इनके इस्तेमाल से सरकारी कामकाज, पढ़ाई, रिसर्च और कारोबार के कई काम आसान हो सकते हैं.

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