मासूम को गोद में लेकर घंटों इंतजार करती रही दहेज प्रताड़ना पीड़िता, वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सुबह 10 बजे पहुंची महिला का शाम 4 बजे तक नहीं दर्ज हुआ बयान
सिंगरौली
महिलाओं को त्वरित सहायता और न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित महिला एवं बाल विकास परियोजना वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। दहेज प्रताड़ना की शिकायत लेकर पहुंची एक महिला अपने छह माह के मासूम बच्चे को गोद में लेकर कई घंटे तक बयान दर्ज कराने के लिए इंतजार करती रही। पीड़िता का आरोप है कि सुबह से शाम तक इंतजार के बावजूद उसका बयान दर्ज नहीं किया गया।

लंघाडोल थाना क्षेत्र की रहने वाली अनिता शाह (20 वर्ष) ने आरोप लगाया है कि उसका विवाह करीब एक वर्ष पहले अजित कुमार शाह से हुआ था। विवाह के समय मायके पक्ष की ओर से मोटरसाइकिल, फर्नीचर, सोने की अंगूठी, 12 हजार रुपये नकद सहित अन्य घरेलू सामान दिया गया था।
पीड़िता के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष द्वारा अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसे परेशान किया जाने लगा। उसने आरोप लगाया कि पति, सास और ससुर द्वारा सोने की चेन, 50 हजार रुपये नकद और बुलेट मोटरसाइकिल की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ गाली-गलौज, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की गई।
महिला ने बताया कि कई बार उसे घर से निकाल दिया गया। उसने आरोप लगाया कि 2 मई 2026 को मारपीट के बाद उसे घर से बाहर कर दिया गया था, जिसके बाद उसने लंघाडोल थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद महिला थाना बैढ़न में भी आवेदन दिया गया।
पीड़िता का कहना है कि समझौते के बाद भी ससुराल पक्ष का व्यवहार नहीं बदला और 18 जुलाई 2026 को फिर उसके साथ मारपीट की गई। उसने आरोप लगाया कि उसके छह माह के बच्चे को भी उससे अलग कर दिया गया और उसे धमकी दी गई।
बयान दर्ज कराने पहुंची थी वन स्टॉप सेंटर
पीड़िता ने बताया कि मामले में बयान दर्ज कराने के लिए वह वन स्टॉप सेंटर पहुंची थी। उसका आरोप है कि वह सुबह करीब 10 बजे सेंटर पहुंच गई थी, लेकिन शाम 4 बजे तक उसका बयान दर्ज नहीं किया गया। इस दौरान वह अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर इंतजार करती रही। महिला का आरोप है कि उसके बाद पहुंचे अन्य मामलों में कार्रवाई की गई, जबकि उसे लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।
अधिकारी ने दूसरे प्रकरण में व्यस्त होने की बताई वजह
इस मामले में वन स्टॉप सेंटर की संबंधित अधिकारी से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि उस समय वह दूसरे प्रकरण की कार्रवाई में व्यस्त थीं, जिसके कारण पीड़िता का बयान तत्काल दर्ज नहीं किया जा सका। पीड़िता ने प्रशासन से मामले में शीघ्र कार्रवाई और न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं, इस घटना ने महिला सहायता केंद्रों में पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
