व्हाइट हाउस डिनर में गोलीबार,क्या हुआ और कैसे टला बड़ा हादसा

अमेरिका में व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान गोलीबारी की घटना ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. चल रहे डिनर के बीच फायरिंग से वहां पर अफरी-तफरी मच गई. इसके बाद सुरक्षा एजेंसी एक्टिव हो गई. इन कार्यक्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी समेत कई बड़े नेता वहां पर मौजूद थे. इस घटना के बाद से यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई की और बड़े हादसे को टाल दिया. इस बीच एक सवाल तेजी से उठ रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगी सीक्रेट सर्विस कितनी मजबूत है? या इसमें लोगों का चयन कैसे होता है या ट्रेनिंग में क्या-क्या सिखाया जाता है.

क्या है सिक्रेट सर्विस और कैसे करते हैं काम?
यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस अमेरिका की खास एजेंसी है, जो केवल राष्ट्रपति ही नहीं बल्कि उपराष्ट्रपति उनके परिवार समेत कई बड़े नेताओं की हिफाजत करते हैं. इनके दो मुख्य काम होते हैं- पहला वीओईपी सुरक्षा और दूसरा आर्थिक और साइबर अपराधों की जांच. इसका गठन 1865 में नकली नोटों पर ब्रेक लगाने के लिए किया गया था. हालांकि, समय के साथ-साथ इनकी जिम्मेदारियां बढ़ा दी गई हैं.

बहुत टफ होती है ट्रेनिंग
सीक्रेट सर्विस के एजेंट को बेहद कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. उन्हें भीड़ में सुरक्षा देने, खतरों की पहचान करने और हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके साथ ही साइबर अपराधी को पकड़ने की भी ट्रेनिंग होती है. हालांकि, कोई इन्हें पहचान न पाए इसके लिए ये सिंपल से कपड़ों में रहते हैं. सीक्रेट एजेंट का चयन बेहद कठिन होता है. इसके लिए फिजिकल टेस्ट, मेंटल मजबूती, बैंकग्राउंड चेक समेत कई लेवल शामिल होते हैं.  

मल्टी लेयर सुरक्षा में होते हैं राष्ट्रपति
अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा कई लेवल में होती है. इसमें सैकड़ों ट्रेंड एजेंट, काउंटर स्नाइपर टीमें और खुफिया एजेंसी शामिल रहती है. एजेंट राष्ट्रपति के हर मूवमेंट पर अपनी पैनी नजर बनाए रखते हैं और खतरे का अंदाजा पहले से ही लगाने की कोशिश करते हैं. किसी भी बड़े कार्यक्रम से पहले पूरी जगह की चेकिंग होती है.

शुरुआत सुरक्षा से नहीं, नकली नोटों से हुई
हैरानी की बात यह है कि 1865 में जब सीक्रेट सर्विस बनी तो इसका काम राष्ट्रपति की सुरक्षा करना नहीं था. उस समय इसका मुख्य मकसद नकली करेंसी पर नकेल कंसना था. आज भी सीक्रेट सर्विस का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी वित्तीय ढांचे की सुरक्षा और वित्तीय अपराधों की जांच करते हैं.

जहां 'खून और पसीना' बहाना मामूली है
इनकी ट्रेनिंग दुनिया की सबसे कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग्स के बराबर होती है. नए एजेंट्स को 7 महीने की कठोर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है, जिसमें मैरीलैंड के जेम्स जे. रोली ट्रेनिंग सेंटर में सिक्स-फिगर सैलरी वाले प्रोफेशनल्स को भी पसीना आ जाता है.

वॉटर सर्वाइवल और मेडिकल ट्रेनिंग-
इन्हें पानी में बचने और युद्ध क्षेत्र जैसी चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि अगर राष्ट्रपति को खरोंच भी आए, तो एजेंट ही डॉक्टर बन जाए. ये एजेंट सिर्फ निशाना नहीं लगाते बल्कि हॉस्टेज रेस्क्यू और मूविंग टारगेट के विशेषज्ञ होते हैं.

द बीस्ट और ड्राइविंग का हुनर
राष्ट्रपति की कार जिसे The Beast कहा जाता है उसे चलाने वाले एजेंट आम ड्राइवर नहीं होते. उन्हें 'इवेसिव ड्राइविंग सिखाई जाती है यानी चलती कार को 180 डिग्री घुमाना या हमले के वक्त तेज रफ्तार में कार को सुरक्षित बाहर निकालना उनके बाएं हाथ का खेल है.

सीक्रेट कोड्स और चश्मा क्यों पहनते हैं?
आपने देखा होगा कि ये अक्सर काला चश्मा पहनते हैं. इसके पीछे कोई स्टाइल नहीं बल्कि एक खास वजह है.
चश्मा पहनने से हमलावर को यह पता नहीं चलता कि एजेंट की नजरें कहां हैं. वे भीड़ में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बिना किसी को पता चले स्कैन कर सकते हैं. राष्ट्रपति और उनके परिवार के लिए सीक्रेट कोड्स होते हैं .

गोली खाने के लिए तैयार रहना
सीक्रेट सर्विस की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिकता होती है. ट्रेनिंग के दौरान उन्हें बार-बार सिमुलेशन में डाला जाता है जहां उन्हें राष्ट्रपति को बचाने के लिए खुद को ढाल बनना होता है.

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