ट्रंप पॉलिसी का दिखेगा असर, 250 सालों के इतिहास में पहली बार आबादी में हो सकती है गिरावट

वॉशिंगटन 
अमेरिका में 250 सालों के इतिहास में पहली बार आबादी में गिरावट आने वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रवासियों के आने में कमी आई है। यही नहीं देश में प्रवासियों की संख्या 5,25,000 कम होनी है। एक तरफ यह गिरावट आएगी तो वहीं अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों का आंकड़ा 5 लाख 19 हजार रहने का अनुमान है। इस तरह अमेरिका की आबादी में कुल 6000 लोगों की कमी इस साल दर्ज की जाएगी। अमेरिकन इंटरप्राइजेज इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में सिविल वॉर के दौरान 7 लाख लोग मारे गए थे। तब भी आबादी में गिरावट नहीं आई थी। कोरोना काल में भी अमेरिका की आबादी निगेटिव में नहीं गई थी।

इसलिए यह ऐतिहासिक होगा कि अमेरिका की आबादी में इस साल गिरावट दर्ज होगी। आबादी में इस कमी की वजह अमेरिका की घटती जन्मदर भी है। बीते करीब 30 सालों से अमेरिका की औसत जन्मदर 1.6 ही बनी हुई है, जबकि रिप्लेसमेंट लेवल के लिए भी 2.1 जरूरी मानी गई है। इस तरह अमेरिका में परिवार लगातार छोटे हो रहे हैं और बच्चे पैदा करने में लोगों की रुचि कम हो रही है। इंस्टिट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज के अनुसार अमेरिका में हर सप्ताह सेक्स करने वाले महिला और पुरुषों की संख्या 37 फीसदी ही है, जबकि 1990 में यह औसत 55 पर्सेंट था।

बता दें कि अमेरिका में पहले ही प्रवासियों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है। आने वालों का आंकड़ा कम हुआ है तो वहीं निकलने वाले बढ़ गए हैं। इस साल के शुरुआत 6 महीनों में ही 14 लाख प्रवासियों ने अमेरिका छोड़ दिया है। अमेरिका के गृह विभाग का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से 16 लाख माइग्रेंट अमेरिका छोड़ चुके हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियां प्रवासियों को अमेरिका आने से हतोत्साहित करने वाली हैं। यही नहीं अवैध रूप से अमेरिका में आने के नाम पर प्रशासन ने 3,59,000 लोगों को अरेस्ट किया है। इनमें से 3 लाख 32 हजार लोगों को डिपोर्ट किया गया है।

यह आंकड़ा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के शुरुआती 200 दिनों का है। हालांकि दिलचस्प तथ्य यह है कि प्रवासियों की संख्या कम होने के बाद भी देश में 15 फीसदी आबादी ऐसे लोगों की है, जो किसी और मुल्क में पैदा हुए हैं और अब अमेरिका में हैं। जानकारों का मानना है कि आबादी में कमी और खासतौर पर प्रवासियों की घटती संख्या के चलते वर्कफोर्स का संकट भी पैदा हो सकता है।

 

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