इंदौर
वार्ड 60 की पार्षद सुनेहरा अंसारी की पार्षदी बरकरार रहेगी। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सुनेहरा अंसारी के निर्वाचन को शून्य घोषित करने वाले जिला कोर्ट के 17 जुलाई 2026 को सुनाए गए फैसले पर गुरुवार को रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने गुरुवार को जिला कोर्ट के आदेश पर स्टे देते हुए इस वार्ड में निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा को भी रोक दिया है। वार्ड में चुनावी प्रक्रिया, किसी अन्य के पदभार ग्रहण करने पर भी अंतरिम रोक लगा दी गई है।

वर्ष 2022 में हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड 60 से सुनेहरा अंसाफ अंसारी ने लगभग पांच हजार मतों से जीत हासिल की थी। उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए इफ्तेखार (मुन्ना) अंसारी ने जिला कोर्ट में चुनाव याचिका प्रस्तुत की थी। इस याचिका में आरोप लगाया था कि सुनहरा अंसारी ने नामांकन फार्म के साथ अपनी संपत्ति के संबंध में जो नो-ड्यूज प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है वह गलत है।
टैक्स की गणना भी कम की गई। आरोप यह भी था कि अंसारी ने भ्रामक प्रचार किया और मतदाताओं को भ्रमित किया। 17 जुलाई 2026 को जिला कोर्ट ने याचिका स्वीकारते हुए सुनेहरा अंसाफ अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था। सुनेहरा ने इस फैसले को चुनौती देते हुुए हाई कोर्ट में सीविल अपील प्रस्तुत की है जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनेहरा अंसारी की ओर से अधिवक्ता विशाल बाहेती ने तर्क रखे।
यह तर्क रखे अंसारी के वकील ने
एडवोकेट बाहेती ने तर्क रखे और कहा कि चुनाव के वक्त नगर निगम ने नियमानुसार अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया था। बाद में एक निगम कर्मचारी ने कोर्ट में रजिस्टर पेश कर दावा कर दिया कि अंसारी पर संपत्ति कर बकाया था, जबकि वह विवादित संपत्ति थी और उस वक्त याचिकाकर्ता के श्वसुर के नाम पर दर्ज थी। जिला कोर्ट में अंसारी के निर्वाचन को चुनौती देने वाले मुन्ना अंसारी की ओर से तर्क रखा गया कि सुनेहरा अंसारी के पास घोषित संपत्तियों के अलावा अन्य संपत्ति भी है। इसे छुपाया गया है।
यह कहा शासन की ओर से
शासन की ओर से तर्क रखे गए कि निर्वाचन आयोग ने वार्ड 60 की सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। साथ ही यहां उप चुनाव की तारीख भी घोषित हो चुकी है। ऐसी स्थिति में कोर्ट को दखल नहीं करना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। इस संबंध में कई न्याय दृष्टांत भी कोर्ट में प्रस्तुत किए गए।
यह कहा कोर्ट ने
सभी पक्षकारों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुनेहरा अंसाफ अंसारी को राहत देते हुए उनकी ओर से प्रस्तुत अंतरिम आवेदन स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने जिला कोर्ट के आदेश के निष्पादन और क्रियान्वयन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि इस याचिका के अंतिम निराकरण तक चुनाव आयोग या प्रशासन द्वारा उपचुनाव कराने, किसी अन्य व्यक्ति को निर्वाचित घोषित करने जैसी कोई भी परिणामी कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले में अब चार सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।
यह भी माना कोर्ट ने
हाई कोर्ट ने माना कि मामला केवल चुनावी प्रक्रिया के बीच दखल देने का नहीं है, बल्कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि को बिना किसी गलती के हटाने का है। कानूनन अगर किसी निर्वाचित उम्मीदवार की अपनी कोई व्यक्तिगत गलती या भ्रष्ट आचरण सिद्ध न हुआ हो, तो उसके निर्वाचन को निरस्त कर उस क्षेत्र को बिना प्रतिनिधित्व रखना मतदाताओं के साथ अन्याय है। अंसारी मतदाताओं के लोकतांत्रिक जनादेश के अनुसरण में वार्ड 60 की विधिवत निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं और मतदाताओं की इच्छा को इस प्रकार विफल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
