बाल भलाई कमेटी की मेहनत रंग लाई, बिछड़ी बच्ची पहुंची मां की गोद

फतेहगढ़ साहिब

वर्ष 2015 में मात्र सात वर्ष की उम्र में लापता हुई बच्ची को जिला बाल भलाई कमेटी फतेहगढ़ साहिब ने लगभग 11 साल बाद उसकी मां और भाइयों से मिला दिया। वर्षों बाद बेटी को सामने देखकर मां शांति देवी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। यह भावुक दृश्य देख मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें भी नम हो गईं।

जानकारी के अनुसार रूपा मूल रूप से बिहार के जिला दरभंगा के गांव गैगटी की रहने वाली है। वर्ष 2015 में उसका परिवार काम की तलाश में दिल्ली आया था और सिंधु बॉर्डर के पास गांव भरौटा में रहने लगा था। उसी दौरान रूपा घर से खेलने निकली और लापता हो गई। काफी तलाश के बाद 7 मई 2015 को कुंडली थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करवाई गई।

2016 में सरहिंद रेलवे स्टेशन पर मिली थी बच्ची

1 मई 2016 को सरहिंद रेलवे पुलिस को एक बच्ची मिली, जिसे जिला बाल भलाई कमेटी के सुपुर्द किया गया। काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने अपना और माता-पिता का नाम तो बताया, लेकिन गांव और जिले की सही जानकारी नहीं दे सकी। कमेटी ने बिहार से संपर्क भी किया, पर कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उसे पटियाला के पूर्ण बाल निकेतन होम में भेज दिया गया, जहां उसकी परवरिश और पढ़ाई हुई। हाल ही में उसे जालंधर के गांधी वनीता आश्रम भेजा गया था।

मासी ने पहचानी बच्ची

चेयरमैन एडवोकेट अनिल गुप्ता ने बताया कि सितंबर 2025 में पंचकुला के एसआई राजेश कुमार से संपर्क हुआ। उन्होंने बच्ची की फोटो और जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। वायरल वीडियो को रूपा की मासी की बेटी ने पहचान लिया और संपर्क किया।

आखिरकार जालंधर से लाकर रूपा को उसकी मां और भाइयों को सौंप दिया गया। उसके पिता का 2018 में निधन हो चुका है। वर्तमान में 18 वर्षीय रूपा +1 की छात्रा है और पूरी तरह स्वस्थ है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *