रिवायत : ग़ज़लों की खुशनुमा महफ़िल 25 जनवरी को सजेगी
रिवायती ग़ज़लें सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि रूह की आवाज़ होती हैं: सुश्री श्रुति प्रभला बिलासपुर रिवायत का अर्थ है परंपरा और रीति-रिवाज़। शताब्दियों पूर्व लिखी गई रिवायती ग़ज़लें आज भी ऐसी प्रतीत होती हैं, मानो वे हमारे ही जीवन की आपबीती हों। इन ग़ज़लों को सुनते हुए ऐसा महसूस होता है कि हर शेर श्रोता…
