बेंगलुरु के स्टार्टअप में न अटेंडेंस की टेंशन, न छुट्टियों का हिसाब; सिर्फ काम के नतीजों पर जोर
क्या दफ्तर का मतलब सिर्फ सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी कुर्सी पर बैठकर घड़ी देखना है? क्या आठ घंटे की मौजूदगी साबित करने से ही यह तय होता है कि आपने काम किया है या नहीं? बेंगलुरु के एक उभरते हुए स्टार्टअप ने कॉर्पोरेट जगत के इस सालों पुराने दकियानूसी मिथक…
