भगवान श्रीराम के जीवन के 5 गौरवशाली पल, जिन्होंने उन्हें बनाया ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’
जरा सोचें उस समय के बारे में जब धरती पर अधर्म बढ़ गया था. राक्षसों का आतंक इतना ज्यादा था कि ऋषि-मुनि तक शांति से यज्ञ नहीं कर पाते थे. समाज की मर्यादा खतरे में थी और कई राजा धर्म के बजाय अपनी शक्ति के बल पर शासन करने लगे थे. ऐसे कठिन समय में…
