लेवी और दहशत का दौर खत्म, झारखंड में एक-एक कर खत्म हुए माओवादी संगठन
रांची शासन से असंतुष्ट होकर सत्ता के विरुद्ध उठाए गए हथियार को झुकाने में सुरक्षा बलों को दो दशक का लंबा अंतराल लगा। छह सौ से अधिक जवानों-अधिकारियों का बलिदान देना पड़ा। केंद्र व राज्य की सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ निरंतर अभियान चलाया। प्रलोभन दिया, राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति जैसा…
