GDP में गिने जाएंगे गृहिणियों के श्रम के घंटे? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद उठे बड़े सवाल
भोपाल सर्वोच्च न्यायालय ने 11 जून को फैसला सुनाया कि मोटर दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवज़ा तय करते समय गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक घरेलू श्रम को एक स्वतंत्र आर्थिक मूल्य दिया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने प्रति माह ₹30,000 की न्यूनतम काल्पनिक आय निर्धारित की। गृहिणियों को "राष्ट्र निर्माता" मानते हुए, न्यायमूर्ति…
