धरती आबा बिरसा मुंडा: आंदोलन, बलिदान और ब्रिटिश हुकूमत को हिला देने वाली कहानी
रांची कोकर के डिस्टिलरी पुल के पास आज के दिन ही नौ जून, 1900 को धरती आबा का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। तब, यह क्षेत्र काफी सुनसान था। जंगल था। एक नदी बहती थी, जो अब विकास की भेंट चढ़ गई। 125 साल पहले 25 साल के युवा बिरसा से ब्रिटिश सरकार डरी-सहमी…
