यूपी में ड्रॉपआउट रोकने की रणनीति तेज, घर-घर सर्वे से शिक्षा अभियान को गति

लखनऊ

 उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को सशक्त बनाने के लिए ‘स्कूल चलो अभियान’ को निर्णायक और मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का यह कदम इस स्पष्ट संदेश के साथ आया है कि अब प्रदेश का कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

वंचित वर्गों पर विशेष ध्यान
इस अभियान के तहत आगामी पहली मई से पूरे प्रदेश में एक व्यापक और विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत मुख्य रूप से श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और समाज के वंचित वर्गों के बच्चों को चिह्नित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। सरकार ने दिव्यांग बच्चों के नामांकन को प्राथमिकता देने के साथ-साथ 'शिक्षा के अधिकार' (RTE) के तहत लॉटरी से चयनित पात्र बच्चों का आवंटित विद्यालयों में शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में भी छात्राओं के प्रवेश को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

ड्रॉपआउट रोकने की अभूतपूर्व रणनीति
बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटने (ड्रॉपआउट) की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर ठोस रणनीति तैयार की है। शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के लिए कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 के स्तर पर 100% ट्रांजिशन (कक्षा परिवर्तन) सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रारंभिक या माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद बच्चे अगली बड़ी कक्षा में अनिवार्य रूप से प्रवेश लें।

सक्रिय भागीदारी और कड़ी मॉनिटरिंग
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग की योजना बनाई गई है। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक गाँव, वार्ड और बस्ती स्तर पर घर-घर जाकर सर्वे करें और स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को चिह्नित कर उन्हें तुरंत विद्यालयों से जोड़ें। जहाँ पूर्व में ड्रॉपआउट एक गंभीर चिंता का विषय था, वहीं अब योगी सरकार तकनीक और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से हर बच्चे को स्कूल तक पहुँचाने का कार्य कर रही है।

 

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