भारत में स्टार्टअप अब केवल बिजनेस मॉडल नहीं, बदलती सोच का प्रतीक है। देश में एक अरब डॉलर से अधिक मूल्य के 100 से ज्यादा स्टार्टअप कारोबार कर रहे हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं से इस क्षेत्र को बढ़ावा भी मिल रहा है। स्टार्टअप की शुरुआत कैसे करें, किन क्षेत्रों में स्टार्टअप के लिए हैं ज्यादा अवसर और आगे बढ़ने की क्या रणनीति हो, जानिए करियर सलाहकार सूर्यप्रताप सिंह से।
भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक देश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2.23 लाख से अधिक हो चुकी है। सिर्फ 2025-26 में ही 55 हजार से ज्यादा नए स्टार्टअप्स को मान्यता मिली, जो उससे पहले की तुलना में वर्तमान तेज बढ़ोतरी को दिखाता है। इन स्टार्टअप्स ने मिलकर देश में 23 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित किए हैं, जिससे भारत आज अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन गया है। भारत सरकार ने BHASKAR (भारत स्टार्टअप नॉलेज एक्सेस रजिस्ट्री) लॉन्च किया है, जो पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक जगह जोड़ने का काम करता है।
किन क्षेत्रों में बढ़ रहे स्टार्टअप
स्टार्टअप के नजरिए से एवीजीसी (एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग और कॉमिक्स) सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर्स में से एक है। सरकार ‘क्रिएट इन इंडिया’ के तहत इसे बढ़ावा दे रही है व स्कूल-कॉलेजों में एवीजीसी लैब्स भी शुरू हो रही हैं।
एप डेवलपमेंट, डिजिटल सर्विसेज, कंटेंट क्रिएशन और सॉफ्टवेयर सर्विस (SaaS), एआई -ऑटोमेशन, एग्रीटेक और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर में भी स्टार्टअप तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। फिनटेक, एडटेक, और हेल्थटेक सेवाओं का दायरा बढ़ा है। फूड सेक्टर में क्लाउड किचन और होम-शेफ मॉडल उभर रहे हैं, जबकि ई-कॉमर्स और डी2सी ब्रांड्स सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना रहे हैं।
शुरुआत कैसे करें : बड़े निवेश के बजाय छोटे स्तर पर शुरुआत करें। अपने आइडिया का मिनी मॉडल बनाकर उसे टेस्ट करें और इंटर्नशिप के जरिए बिजनेस ऑपरेशन्स समझें। साथ ही नई तकनीक सीखना, मार्केट, यूजर की जरूरत और बेसिक फाइनेंस की समझ भी जरूरी है।
प्रशिक्षण कैसे और कहां से
●फंडिंग से पहले मार्गदर्शन के लिए maarg.startupindia.gov.in अनुभवी मेंटर्स से जोड़ता है।
●‘स्टार्टअप इंडिया’ का लर्निंग प्रोग्राम उद्यमिता और फंडिंग की बुनियादी समझ देता है।
●‘स्वयं’ प्लेटफॉर्म पर आईआईटी के एनपीटीईएल कोर्स उद्यमिता को गहराई से सिखाते हैं।
●कोर्सेरा और एडएक्स पर स्टार्टअप, फंडिंग और बिजनेस ग्रोथ से जुड़े कई कोर्स हैं।
●अनुभव के लिए इंटर्नशाला, अनस्टॉप और लिंक्डइन जैसे मंचों पर स्टार्टअप इंटर्नशिप मिलती हैं। खासकर अनस्टॉप पर टेक, मार्केटिंग, फाइनेंस और बिजनेस डेवलपमेंट से जुड़े कामों में बड़ी संख्या में मौके मिलते हैं।
कितनी होगी कमाई : स्टार्टअप में लक्ष्य तय वेतन नहीं, बल्कि कंपनी की वैल्यू बढ़ाना होता है। जब प्रोडक्ट बाजार की जरूरत के मुताबिक फिट हो जाता है, तो संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
फंडिंग के रास्ते
सरकारी फंडिंग के लिए आवेदन से पहले स्टार्टअप को रजिस्टर करके डीपीआईआईटी प्रमाण पत्र लेना होगा। अटल इनोवेशन मिशन के तहत देश भर में इन्क्यूबेशन सेंटर्स हैं, जो ग्रांट्स और शुरुआती फंड दिलाने में मदद करते हैं। हैदराबाद के टी-हब (t-hub.co) पर भी उद्यमिता क्षमता विकास के कोर्स हैं।
बूट स्ट्रैपिंग या सेल्फ फंडिंग : शुरुआत में अपनी जमापूंजी या परिवार-दोस्तों की मदद से पैसा लगाना सबसे सामान्य तरीका है। इसमें पूरा नियंत्रण आपके पास रहता है, लेकिन पूरा जोखिम भी आपका होता है।
एंजेल इन्वेस्टर्स: शुरुआती दौर में अनुभवी निवेशक स्टार्टअप में पैसा लगाते हैं। भारत में इंडियन एंजल नेटवर्क और मुंबई एंजल्स जैसे नेटवर्क सक्रिय हैं।
वेंचर कैपिटल : स्टार्टअप गति पकड़ने लगता है, तब बड़ी निवेश कंपनियां पैसा लगाती हैं।
प्रमुख सरकारी योजनाएं
मुद्रा और स्टार्टअप इंडिया सीड फंड जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं के प्रबंधन और धन आवंटन की नोडल संस्था के रूप में सिडबी कार्य करता है।
स्टार्टअप इंडिया: इसके तहत स्टार्टअप्स को पहले डीपीआर्ईआईटी से मान्यता लेनी होती है और फिर पोर्टल पर रजिस्टर करना होता है। इसके बाद स्टार्टअप्स को शुरुआती वर्षों में टैक्स छूट मिल सकती है, पेटेंट फाइलिंग पर फीस में छूट मिलती है और सरकारी योजनाओं व टेंडर तक आसान पहुंच मिलती है। वेबसाइट है startupindia.gov.in
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना : यह योजना छोटे व्यवसायों को बिना गारंटी के 10 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध कराती है, जिससे बिजनेस शुरू करना आसान होता है।
सीजीटीएमएसई (cgtmse.in) शुरुआत या विस्तार के इच्छुक स्टार्टअप्स के लिए, सॉफ्टवेयर उत्पाद आधारित स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग योजना, जैसे समृद्ध एस msh.meity.gov.in/schemes/samridh भी काम आएंगे।
छोटे शहरों में भी बन रहे मौके
भारत के कई टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी नए स्टार्टअप तेजी से सामने आ रहे हैं, क्योंकि यहां लागत कम है और डिजिटल पहुंच बढ़ी है। स्टार्टअप हब के रूप में जहां बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद और पुणे शीर्ष पर हैं, वहीं जयपुर, इंदौर और कोयंबटूर जैसे टियर-2 शहर भी तेजी से उभर रहे हैं।
मार्केट रिसर्च और आम गलतियां
शुरुआत में बिना टेस्टिंग बड़ा प्रोडक्ट बनाना और यूजर फीडबैक नजरअंदाज करना बड़ी गलती हो सकती है। बेहतर है कि पहले छोटा मॉडल तैयार कर उसे टेस्ट किया जाए और साथ ही सर्वे एवं कॉम्पिटिटर्स का विश्लेषण किया जाए।

