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बठिंडा चुनाव से पहले अकाली दल को झटका, वार्डबंदी मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

बठिंडा.

बठिंडा नगर निगम चुनावों को लेकर शिरोमणि अकाली दल द्वारा दायर की गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस याचिका में नगर निगम की वार्डबंदी, वार्डों की सीमाओं और मतदाताओं की संख्या को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। यह याचिका शिरोमणि अकाली दल के हलका इंचार्ज इकबाल सिंह बबली ढिल्लों की ओर से दाखिल की गई थी।

अकाली दल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि बठिंडा नगर निगम की वार्डबंदी प्रक्रिया के दौरान कई तरह की अनियमितताएं की गई हैं। पार्टी का कहना था कि कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या असमान रूप से तय की गई है, जबकि कई इलाकों की सीमाएं भी गलत तरीके से निर्धारित की गई हैं। अकाली दल ने दलील दी थी कि यह सब सत्ताधारी पक्ष को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है।

याचिका में पारदर्शिता पर उठे थे सवाल
याचिका में यह भी कहा गया था कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वार्डबंदी और मतदाता सूचियों की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए। पार्टी नेताओं का मानना था कि यदि इस प्रकार की गड़बड़ियों को नहीं रोका गया तो नगर निगम चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद बठिंडा नगर निगम चुनावों को लेकर चल रही कानूनी अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हो गई है। इस फैसले के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

सत्ताधारी पक्ष ने फैसले का किया स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने कहा कि पार्टी ने जनता की आवाज और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह मामला अदालत के समक्ष रखा था। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि वार्डबंदी को लेकर लोगों में अब भी नाराजगी है और पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर उठाती रहेगी। वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से विवादित बनाने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूरी प्रक्रिया कानूनी नियमों और निर्धारित प्रावधानों के तहत पूरी की गई है।

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