अबोहर.
अबोहर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी का बोर्ड बनने के बाद आम आदमी पार्टी में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के हलका इंचार्ज अरुण नारंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने नगर निगम में पार्टी का मेयर नहीं बन पाने की जिम्मेदारी खुद लेते हुए नैतिक आधार पर पद छोड़ने का फैसला किया।
अरुण नारंग ने साफ किया कि उनका इस्तीफा केवल हलका इंचार्ज पद से है, पार्टी से नहीं। वह आगे भी आम आदमी पार्टी के एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे। नारंग ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया को ईमेल के माध्यम से भेज दिया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी और मेयर पद हासिल नहीं हो पाया। इसलिए उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया।

पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ा
उन्होंने कहा कि हलका इंचार्ज के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ा है। पिछले चुनावों की तुलना में पार्टी के वोट प्रतिशत में भी बढ़ोतरी हुई है। नगर निगम चुनाव में 50 वार्डों में से 20 वार्डों में पार्टी के उम्मीदवारों की जीत इसका प्रमाण है। इसके बावजूद पार्टी का मेयर नहीं बन सका, इसलिए वह स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं। अरुण नारंग ने कहा कि पार्टी नेतृत्व जिस भी नेता को नया हलका इंचार्ज नियुक्त करेगा, वह उसके साथ पूरी निष्ठा से काम करेंगे। उनका उद्देश्य संगठन को मजबूत करना है और वह भविष्य में भी पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने का कार्य जारी रखेंगे।
आप के कामकाज से संतुष्ट हैं जनता
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार की नीतियों और विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट है। उनका विश्वास है कि आगामी चुनावों में आम आदमी पार्टी पहले से बेहतर प्रदर्शन करेगी और वह इस मिशन का हिस्सा बने रहेंगे। अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने की अटकलों को भी अरुण नारंग ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल हलका इंचार्ज पद से इस्तीफा दिया है, पार्टी से नहीं। वह आगे भी एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में संगठन के लिए काम करते रहेंगे।
पार्टी के आदेश का हमेशा करेंगे सम्मान
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करता या उन्हें पद पर बने रहने का निर्देश देता है तो वह संगठन के निर्णय का पूरा सम्मान करेंगे। फिलहाल उनके इस्तीफे को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है। वहीं, उनके इस्तीफे के बाद अबोहर की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और सभी की नजर आम आदमी पार्टी के अगले संगठनात्मक फैसले पर टिकी हुई है।
