रांची.
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान जवान अजय लकड़ा की मौत हो गई। अजय लकड़ा धुर्वा स्थित लाबेद गांव के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि वह खाई में गिरने से शहीद हुए। उनके परिवार के लिए यह घटना एक बड़ा सदमा है।
अजय लकड़ा के पिता स्वर्गीय लोहरा उरांव की कई वर्ष पहले मौत हो गई थी। उस समय अजय बहुत छोटे थे। पिता की मृत्यु के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पोकलो देवी ने उठाई। उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण अत्यंत कठिन परिस्थितियों में किया। अजय लकड़ा का एक छोटा भाई अरूण लकड़ा है और उनके चार बहनें हैं। मां ने बच्चों को हड़िया बेचकर और मजदूरी कराकर पढ़ाया और पालन-पोषण किया। अजय लकड़ा का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था।
उन्होंने हमेशा शारीरिक रूप से खुद को तैयार रखा और दौड़ने जैसी मेहनत वाली गतिविधियों में भाग लिया। इसी जुनून के चलते अजय सात साल पहले सेना में भर्ती हुए। उनका भाई भी सीआइएसएफ में तैनात है और उनकी सबसे छोटी बहन अंजू लकड़ा झारखंड पुलिस में पदस्थापित हैं। अजय की तीन बहनों की शादी हो चुकी है।
सेना के अधिकारियों ने मां को फोन पर बेटे की मौत की दी सूचना
सेना ने शहीद जवान अजय लकड़ा की मां को फोन पर उनकी मौत की जानकारी दी। अजय की मृत्यु की खबर से पूरे गांव में मातम छा गया है। अजय का शव शनिवार को रांची पहुंचने की संभावना है। उनके परिवार के लोग रोते-बिलखते हुए भावुक नजर आए। माता-पिता और भाई-बहनों के साथ-साथ पूरे गांव में लोग अजय की शहादत को याद कर उनका सम्मान कर रहे हैं। उनके दोस्तों और सहकर्मियों ने भी कहा कि अजय हमेशा साहसी और जिम्मेदार जवान थे। मां पोकलो देवी ने अपने संघर्ष और मेहनत के बलबूते पर अपने छह बच्चों में तीन को सरकारी नौकरी लगावाया। उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया जहां वह अपना नाम कर सके।
दिसंबर में छुट्टी पर रांची आया था शहीद जवान अजय
दिसंबर माह में अजय अपने घर 15 दिन की छुट्टी पर आए थे। छुट्टी पूरी करने के बाद वह जम्मू-कश्मीर लौट गए थे। उनका विवाह नहीं हुआ था, जबकि उनके छोटे भाई अरूण की शादी वर्ष 2025 में हो चुकी थी। अजय ने हमेशा अपनी मां से कहा था कि पूरी जिम्मेदारी निभाने के बाद ही विवाह करेंगे। अजय लकड़ा की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार में शोक का माहौल है।

