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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अन्न, किसान और प्रकृति के संरक्षण का दिया संदेश

भारत की राष्ट्रपति रायपुर में नुआखाई महोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में शामिल हुईं

अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सब का सामूहिक दायित्व है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

रायपुर
भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु आज रायपुर, छत्तीसगढ़ में नुआखाई महोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि नुआखाई मिलन समारोह केवल एक सांस्कृतिक समारोह नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने, और भारतीय जीवन-मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि नुआखाई पर्व हमारी कृषि परंपरा को संजो कर रखने, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामुदायिक भावनाओं का उत्सव है। यह उत्सव हमें याद दिलाता है कि अन्न केवल हमारी भूख मिटाने का साधन नहीं है; बल्कि किसान भाई-बहनों के परिश्रम, धरती की उदारता और प्रकृति के अनमोल उपहार का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सब का सामूहिक दायित्व है।

समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, और चुनौतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन प्रत्येक युवा के भीतर कुछ नया करने, कुछ बेहतर बनाने और अपनी पहचान स्थापित करने की ललक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब वे अपने व्यक्तिगत प्रयासों को सामूहिक और राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ेंगे, तब देश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने युवाओं को सपने ऊंचे रखने, अपने विचारों को व्यापक बनाने, श्रेष्ठ आचरण करने और अपने मनोमस्तिष्क में समाज तथा राष्ट्र के प्रति सेवा-भाव बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित किया कि वे जो भी कार्य करें उसे ईमानदारी, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र का निर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं होता बल्कि करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से होता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे ज्ञान के साथ विनम्रता, महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता और सफलता के साथ सेवा-भाव को जोड़ें। उन्होंने कहा कि ये गुण विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उनके योगदान को और सशक्त बनाएंगे।

राष्ट्रपति ने नुआखाई मिलन समारोह में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिलाओं की समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी महिलाओं से आग्रह किया कि वे देश और समाज के कार्यों में बढ़-चढ़ कर भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आगे बढ़ेंगी तो उसका लाभ केवल उन्हें या उनके परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को भी मिलेगा। उन्होंने पुरुषों, विशेषकर युवाओं, से आग्रह किया कि वे अपनी बहनों-बेटियों को ऐसा वातावरण प्रदान करें जिसमें वे बिना किसी रुकावट के अपने सपनों को साकार कर सकें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि उनके व्यवहार, सोच और दैनिक आचरण में दिखाई देना चाहिए।

राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों और युवाओं की अपनी स्वयं की दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर छत्तीसगढ़ के युवा नक्सलवाद के भटकाव से मुक्त होकर मुख्य धारा में शामिल हो गए हैं। जहां कभी आतंक का अंधेरा था वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन से न केवल युवाओं और उनके परिवारजनों का कल्याण हो रहा है, बल्कि राज्य और भारत के विकास को भी गति मिल रही है।

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