धान की खेती में बदलाव की तैयारी, पंजाब में 5 लाख एकड़ में लागू होगी DSR तकनीक

चंडीगढ़

 देश के सबसे अधिक भूजल संकट झेल रहे राज्यों में शामिल पंजाब में गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए राज्य सरकार ने डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (डीएसआर) तकनीक को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने का फैसला किया है। जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वर्ष 2026-27 के फसल सीजन में राज्यभर में पांच लाख एकड़ भूमि को डीएसआर तकनीक के तहत लाने का लक्ष्य तय किया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पंजाब अपने वार्षिक भूजल पुनर्भरण (ग्राउंडवॉटर रिचार्ज) का 156.36 प्रतिशत तक दोहन कर रहा है। राज्य के 153 प्रशासनिक ब्लॉकों में से 111 ब्लॉक ‘ओवर एक्सप्लॉइटेड’ श्रेणी में आ चुके हैं। इसका अर्थ है कि इन क्षेत्रों में भूजल का इस्तेमाल उसकी प्राकृतिक भरपाई से कहीं अधिक हो रहा है।

इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए पंजाब सरकार ने डीएसआर तकनीक को प्रोत्साहित करने की नीति अपनाई है। इस योजना के तहत डीएसआर अपनाने वाले किसानों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रति एकड़ 1500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। आगामी वित्तीय वर्ष में डीएसआर कार्यक्रम के लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 23,410 किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाई थी। इन किसानों को कुल 35.38 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

डीएसआर तकनीक पंजाब सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भूजल संरक्षण, पारंपरिक धान रोपाई पर निर्भरता कम करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डीएसआर तकनीक पारंपरिक धान खेती की तुलना में पानी, बिजली और श्रम लागत में उल्लेखनीय कमी लाती है। ऐसे में यह तकनीक पंजाब के कृषि और पर्यावरण संबंधी संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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