इकोनॉमिक कॉरिडोर से बुंदेलखंड का पलायन रुकने की उम्मीद, लखनऊ से इंदौर तक बनाने की योजना

सागर
 लंबे समय से प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ने का इंतजार कर रहे बुंदेलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली है. बुंदेलखंड प्रगति पथ के नाम से प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर अब बुंदेलखंड को औद्योगिक विकास की पटरी पर तेज रफ्तार में दौड़ने की तैयारी कर रहा है. खास बात यह है कि बुंदेलखंड प्रगति पथ का फायदा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों मिलने जा रहा है। 

ये कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, सागर से होते हुए औद्योगिक नगरी देवास से कनेक्ट होने जा रहा है. प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर बुंदेलखंड मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, देवास जैसे औद्योगिक शहरों से जुड़ेगा तो उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ से जुड़ जाएगा। 

एक्सप्रेसवे की तर्ज पर होगा तैयार
प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर को एक्सप्रेसवे की भांति तैयार किया जाना है. ये ऐसा प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा है, जो मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के औद्योगिक शहरों को बुंदेलखंड के जरिए जोड़ेगा. इस औद्योगिक गलियारे से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड इंदौर, भोपाल, देवास, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों से जुड़ जाएगा. इसका फायदा दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड यानि उत्तरप्रदेश के साथ जिलों और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को होगा। 

बुंदेलखंड कृषि प्रधान इलाका है और औद्योगिक विकास में पीछे जाने के कारण पलायन यहां की मजबूरी है. लेकिन यह एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड की नई तस्वीर गढ़ेगा. इस एक्सप्रेसवे के कारण औद्योगिक विकास होगा और लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा। 

330 किमी लंबा एक्सप्रेस वे होगा बुंदेलखंड विकास पथ
बुंदेलखंड विकास पथ मध्यप्रदेश का प्रस्तावित इकानामिक कॉरिडोर है. ये करीब 330 किमी लंबा एक्सप्रेसवे है. इसको डिजाइन करने का उद्देश्य पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसको ऐसा डिजाइन किया गया है कि सागर के जरिए ये झांसी-ललितपुर-देवास-सागर को जोड़कर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड को दोनों राज्यों के प्रमुख औद्योगिक शहरों से कनेक्टिविटी है।

बदलेगी बुंदेलखंड की की तस्वीर
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते है "बुंदेलखंड प्रगति पथ प्रस्तावित है. फिलहाल शुरुआती सर्वे और अध्ययन चल रहा है. यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से दोनो राज्यों के बुंदेलखंड को कनेक्ट करेगा. सागर, टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर की औद्योगिक प्रगति का आधार बनेगा. पर्यटन और व्यापार में गति आएगी. मालवा और बुंदेलखंड के बीच परिवहन को रफ्तार देगा।  

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