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10 दिन में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के रेट, मोगा समेत कई शहरों में लोग परेशान

पटियाला 

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार भारी बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर तक इजाफा हुआ। चंडीगढ़ में अब पेट्रोल 101.50 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। वहीं डीजल का दाम 89 रुपये हो गया है।  

पिछले 10 दिनों में चौथी बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं। बढ़ोतरी के बाद मोगा में पेट्रोल 105.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं डीजल 95.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है। लगातार बढ़ते दामों से परेशान लोगों का कहना हे कि इस बढ़ोतरी से आम जनता पर सीधा असर पड़ रहा है। अब हर चीज महंगी हो जाएगी। 

बढ़ोतरी के बाद जालंधर में पेट्रोल 104.80 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं डीजल के दाम 2.71 बढ़कर 94.75 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। पहली बार पेट्रोल ने 100 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।
 
जालंधर के पेट्रोल पंप पर पहुंचे लोगों ने बढ़ती कीमतों पर नाराजगी जताई। सुखजीत सिंह ने कहा कि मजदूरी कर घर का पेट पालते हैं। लगातार बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सब्जियां, दूध और रोजमर्रा का सामान भी महंगा हो जाएगा। लोगों ने सरकार से आम जनता की परेशानियों को देखते हुए राहत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जितनी दिहाड़ी मिलती है उतने का तो पेट्रोल लग जाता है।

सुनील कुमार और बिजली का काम करने वाले साहिब प्रीत सिंह ने भी कहा कि ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से महंगाई तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।  

वहीं पंजाब के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। पंजाब पेट्रोल डीलर एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को इस संबध में पत्र लिखा है और मांग की है कि सप्लाई सही करने के लिए तेल कंपनियों को निर्देश जारी किए जाने चाहिए। अगर सप्लाई न हुई तो आगे स्थिति बिगड़ सकती है। साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को भी पत्र भी की कॉपी भेजी है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, कमजोर होता रुपया और आयात लागत बढ़ने की वजह से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव का असर भी ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के बाद अब सरकारी तेल कंपनियां धीरे-धीरे बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं।  

 

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