लुधियाना.
नगर निगम के संयुक्त कमिश्नर-कम-सिटी सैंसस ऑफिसर ने जनगणना (सैंसस) के काम में लापरवाही बरतने के आरोप में 3 अध्यापकों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। ये कर्मचारी 2 अप्रैल को रखी गई अनिवार्य फील्ड ट्रेनिंग से बिना किसी सूचना के गायब पाए गए थे।
सैंसस ऑफिसर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार जनगणना 2027 के पहले चरण (हाऊस-लिस्टिंग और हाऊसिंग सैंसस) के लिए इन कर्मचारियों की ड्यूटी बतौर 'फील्ड ट्रेनर' लगाई गई थी। इन्हें 2, 3 और 4 अप्रैल को माता रानी चौक के पास स्थित नगर निगम जोन-ए के मीटिंग हॉल में ट्रेनिंग के लिए उपस्थित होना था। ड्यूटी से गैर-हाजिर रहने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए इनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। जिला शिक्षा अधिकारी (स) ने संबंधित स्कूलों को ये नोटिस तुरंत डिलीवर करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
स्टाफ की कमी और मल्टी-टास्किंग का बोझ
इस कार्रवाई ने सरकारी स्कूलों की उस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है जिससे विभाग आंखें मूंद कर बैठा है। जिले ही नहीं बल्कि पंजाब भर के सरकारी स्कूल पिछले लंबे समय से अध्यापकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। स्कूलों में पहले से ही स्टाफ कम है और जो अध्यापक तैनात हैं, उन पर काम का बोझ अपनी क्षमता से कई गुना ज्यादा है। एक तरफ जहां स्कूलों में नया सैशन शुरू हो चुका है और नए दाखिले की प्रक्रिया जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर अध्यापकों को गैर-अकादमिक कामों में उलझाया जा रहा है।
तिहरे दबाव के बीच काम कर रहे अध्यापक
वर्तमान में अध्यापक दोहरे नहीं बल्कि तिहरे दबाव के बीच काम कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अध्यापक बोर्ड परीक्षाओं की मार्किंग ड्यूटी पर लगे हुए हैं। दूसरी तरफ, विभाग द्वारा 'मिशन समर्थ' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अध्यापकों पर अलग से दबाव बनाया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा रोजाना रिपोर्ट मांगी जाती है जिससे अध्यापकों का पूरा ध्यान केवल डेटा जुटाने में ही निकल जाता है। ऐसे में जनगणना जैसे कार्यों के लिए स्कूलों से अध्यापकों को खींचना शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक साबित हो रहा है।

