पटना.
बिहार सरकार ने राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए 15 हवाई अड्डों के विकास की तैयारी शुरू कर दी है. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) से इन एयरपोर्ट्स की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है. रिपोर्ट मिलते ही जमीन पर निर्माण और विस्तार का काम शुरू होगा.
सरकार का फोकस केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन इलाकों को भी हवाई सेवा से जोड़ने की योजना है, जहां अब तक उड़ान की सुविधा नहीं थी. मधुबनी, वीरपुर, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, भागलपुर और सहरसा जैसे शहरों में 19-सीटर विमानों के परिचालन की संभावना का अध्ययन कराया जा रहा है. इसके लिए 2.43 करोड़ रुपये का भुगतान AAI को किया है.
छोटे शहर, बड़ी उड़ान की तैयारी
मोतिहारी और छपरा जैसे शहरों के लिए अलग से व्यवहार्यता अध्ययन कराया जा रहा है, जिस पर 1.21 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. वहीं, बेगूसराय के उलाव और गोपालगंज के सबेया सैन्य हवाई अड्डे को नागरिक उड़ानों के लिए उपयोगी बनाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. हवाई अड्डों के विकास में सुरक्षा सबसे अहम कड़ी है. भागलपुर के सुल्तानगंज, बीरपुर, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, मुजफ्फरपुर और सहरसा में ऑब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेस सर्वे के लिए 2.90 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. इससे उड़ान मार्ग में आने वाली बाधाओं की पहचान होगी.
दरभंगा बनेगा लॉजिस्टिक और कार्गो हब
दरभंगा एयरपोर्ट को सिर्फ यात्री सेवा तक सीमित नहीं रखा जाएगा. यहां 50 एकड़ भूमि पर लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब विकसित करने की योजना है, जिसके लिए 138 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. सहरसा में रनवे विस्तार के लिए 12 एकड़ अतिरिक्त भूमि पर 147 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. भागलपुर के सुल्तानगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए 931 करोड़ रुपये की लागत से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. सोनपुर में 4228 एकड़ भूमि पर नए हवाई अड्डे की योजना है, जबकि रक्सौल और बिहटा में भी विस्तार के लिए राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है.
रोजगार और निवेश को मिलेगी उड़ान
इन परियोजनाओं से न सिर्फ हवाई सफर आसान होगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. बिहार सरकार का मानना है कि एयर कनेक्टिविटी मजबूत होने से राज्य की आर्थिक तस्वीर तेजी से बदलेगी.

