लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में मध्यप्रदेश सबसे आगे

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी एमएसएमई सेक्टर में भारत को ग्लोबल चैम्पियन बना रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय क्षेत्र दूसरों के जीवन को सुखद बनाते हैं। उद्यमी कर्म को पूजा और श्रम को साधना मानते हैं। आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी और सुख का सूरज निकलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में आगामी वर्ष 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जाएगा। समिट में प्रधानमंत्रीमोदी को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रवीन्द्र भवन में "विश्व एमएसएमई दिवस" पर हुई "सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश" समिट को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों, कला शिल्पों की विशाल प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी रविवार 28 जून को भी सभी के लिए खुली रहेगी। शासन द्वारा कपास पर मंडी शुल्क आधा करने सहित उद्यमियों और किसानों के हित में अनेक निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बुरहानपुर सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा अभिनंदन किया गया। समिट में लगभग 2000 उद्यमियों, निवेशकों, स्व-सहायता समूहों के सदस्यों सहित नीति निर्माताओं ने भागीदारी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में लगभग 7 करोड़ एमएसएमई इकाइयां हैं, जिसमें 25 लाख मध्यप्रदेश में हैं। प्रदेश की इकाइयां लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है। जीडीपी में 31 प्रतिशत की हिस्सेदारी एमएसएमई सेक्टर की है। निर्यात में 49 प्रतिशत और विनिर्माण उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत है। इस तरह एमएसएमई सेक्टर अर्थव्यवस्था के इंजन के रूप में कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश का एमएमसएमई सेक्टर जनकल्याण का माध्यम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में रिमोट से एमएसएमई इकाइयों के साथ ही वृहद उद्योगों के लिए भी राशि जारी की। एमएसएमई इकाइयों को 225 करोड़ 19 लाख की राशि और विभिन्न स्टार्ट-अप के लिए लगभग 39 लाख की राशि प्रदान की गई। बड़े उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 1274 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई। इस तरह कुल 1500 करोड़ रुपए उद्योग क्षेत्र को प्रदान किए गए। मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहां मई 2026 तक की समस्त देनदारी का भुगतान उद्यमियों को निवेश सहायता के रूप में किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों के विकास में मध्यप्रदेश आगे है। राज्य सरकार द्वारा कपास के मंडी शुल्क को आधा करने के निर्णय का लाभ किसानों और उद्यमियों को प्राप्त होगा। एमएसएमई दिवस पर एमओयू और उद्योगों के लिए भूखंडों के आवंटन का कार्य हुआ है। राज्य में प्रत्येक जगह उद्योग लगाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश के सबसे इंडस्ट्री प्रोमोटिंग स्टेट के रूप में पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कनाडा, यूके, अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से प्रदेश में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल डिवाइस आदि क्षेत्रों में निवेश आ रहा है। भोपाल में वर्ष 2025 में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद 9 हजार 300 करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतरा हैं।

नई नीतियां और नियम बने लाभकारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत 2 वर्ष में बनाई गई 18 नई नीतियों और नए नियमों का लाभ उद्योगों को मिल रहा है। प्रदेश में ओडीओपी क्षेत्र में भी प्रगति है। वर्ष 2025- 26 में मध्यप्रदेश को 20 जीआई टैग प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2027 युवा वर्ष की थीम पर मनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स का जिम्मा माताओं-बहनों के हाथों में है। गत वर्षों के मुकाबले वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 67 प्रतिशत बढ़ा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 16 क्लस्टर्स का निर्माण किया है और 14 नए क्लस्टर्स पर काम चल रहा है। राज्य को ओडीओपी में उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य सरकार सभी की कठिनाइयों को समझते हुए विकास की धारा में सरलता, शुचिता और पारदर्शी निर्णयों के बलबूते आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण करना भी आवश्यक है। वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस पूरे वर्ष में एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक तरीके से नई ऊंचाई पर लेकर जाएंगे। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। किसानों को ऋण चुकाने के लिए नई सौगात दी गई है। किसान जिस तारीख को ऋण लेंगे, उसके 12 माह की अवधि में ऋण भर सकेंगे। इसके लिए 31 मार्च की बाध्यता खत्म कर दी गई है। राज्य सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रही है। इसके दृष्टिगत वर्ष 2024 को गरीब कल्याण और वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया।

मध्यप्रदेश औद्योगिक सुधारों को लागू करने में आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा तय 23 औद्योगिक सुधारों को शत-प्रतिशत लागू करने में मध्यप्रदेश टॉप अचीवर है। औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है। आज प्रदेश के 13 जिलों में 14 औद्योगिक केंद्र और भवनों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया है। इसी तरह 7 नए औद्योगिक क्षेत्र इंडस्ट्री सेक्टर को नया आकार प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में भारत एमएसएमई सेक्टर के अतिरिक्त कई सेक्टर्स में आगे बढ़ रहा है। इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप योजना, क्लस्टर्स स्कीम जैसी अनेक योजनाएं शामिल हैं। पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार से उद्यमी निरंतर जुड़ रहे हैं।

उद्यमियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले से प्राप्त होने वाले राजस्व के मॉडल तैयार करने का कार्य करेगी, जिससे जिले की अनुकूलता के आधार पर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन देते हुए समृद्धि का पूरा लाभ मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के उद्यमियों से संवाद के दौरान यह बात कही। विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में मध्यांचल कॉटन एंड जिंजर ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कपास पर मंडी शुल्क आधा करने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गजमाला से अभिनंदन किया। कार्यक्रम में लघु उद्योग निगम के अध्यक्षसत्येंद्र भूषण सिंह, उद्योग आयुक्तदिलीप कुमार, सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

एमएसएमई मंत्रीचेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि प्रदेश में आज उद्योगों के विकास का नया वातावरण बना है और यह सब संभव हुआ है गतिशील और प्रबल इच्छा शक्ति के धनी नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से। पिछले 2 वर्षों में ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग के बजट को 1100 करोड़ से 3100 करोड़ तक पहुंचा दिया है। नई एमएसएमई और स्टार्ट-अप पॉलिसी से उद्यमियों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ लगभग 1100 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन मिला है। मंत्रीकाश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के परिश्रम की पराकाष्ठा का ही परिणाम है कि विभाग ने पिछले 2 सालों में 1200 औद्योगिक भूखंड दिए हैं और आगामी वर्षों में 3000 भूखंड उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रदेश में 34 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। प्रदेश में किसान,कृषि और उद्योग क्षेत्र के विकास का अभियान इसी तरह जारी रहेगा।

मुख्य सचिवअनुराग जैन ने कहा कि सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यमों की महत्ता पूरे विश्व ने पहचानी है। मध्यप्रदेश भी एमएसएमई के क्षेत्र में पीछे नहीं है। प्रदेश में होने वाले मैन्युफैक्चरिंग में एमएसएमई का योगदान 45 प्रतिशत और निर्यात 49 प्रतिशत होना ऐतिहासिक है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश ने रोजगार देने में महत्वपूर्ण काम किया है और हम एक साल में देश में 14 से 11 वे स्थान पर पहुंच गए हैं। मुख्य सचिवजैन ने कहा कि "इज ऑफ डूइंग बिजनेस" के तहत नई पॉलिसी बनाई गई है, सैकड़ों कानून खत्म किए गये हैं। लगभग 100 कानूनों में जेल भेजने जैसी सजा के स्थान पर अर्थ दंड लगाने का प्रावधान किया गया है। सब मिलाकर उद्यमियों के लिये मध्यप्रदेश में उद्योग अनुकूल वातावरण मौजूद है। इसके साथ ही आज बैंक से वित्तीय संसाधन भी आसानी से उपलब्ध करवाये जा रहे है। यही वजह है कि कुल 21 प्रतिशत वित्त में से एक लाख 45 हजार करोड़ यानि 11 प्रतिशत एमएसएमई को उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए आगे आकर नेतृत्व करने का आव्हान किया।

उद्यमियों ने कहा – मध्यप्रदेश उद्योगों को बढ़ाने वाला राज्य

समिट में उद्यमी डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश सिर्फ उद्योग स्थापित करने नहीं, बल्कि उद्योग को आगे बढ़ाने वाला राज्य है। किसी भी उद्योग की स्थापना के दौरान अनेक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से उद्योग अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बहुत पारदर्शी हैं। राज्य सरकार की ओर से हमें मिला सहयोग सफलता की पूंजी है। हमारी कंपनी राज्य में 200 करोड़ का निवेश कर चुकी है। आगामी दो वर्षों में मेडिसिन रिसर्च के लिए हमारी कंपनी राज्य में 50 करोड़ का नया निवेश करेगी। मध्यप्रदेश तेजी से फॉर्मा सेक्टर में अनुसंधान का हब बन रहा है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्षराजेश मिश्रा ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्येक विभाग में निवेश प्रोत्साहन सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की है। मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सरकार ने 31 मई 2026 तक की सभी देनदारियां क्लियर की हैं। निश्चित ही यह उद्यमियों और निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेशराघवेंद्र सिंह ने कहा कि गत ढाई वर्ष में सभी तरह के उद्योगों को 11 हजार 500 करोड़ की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी गयी है। मध्यप्रदेश में नए उद्योगों में भरपूर निवेश हो रहा है। ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट : 2025 में 30 लाख 77 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से 30 प्रतिशत धरातल पर आ गाए हैं। मध्यप्रदेश की एमएसएमई ने अपने उत्पादों की क्वालिटी को बेहतर किया है और 19 हजार प्रमाणन इसका उदाहरण है। प्रमुख सचिवसिंह ने प्रदेश में बदलते उद्योग परिवेश के बारे में भी जानकारी दी। कैंसर के उपचार की दवा के निर्माण और रिसर्च में संलग्न फार्मा कंपनी भी मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों के सहयोग से आज दुनिया के अनेक देशों तक पहुंच गई है।

समिट की प्रमुख गतिविधियां

  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 750 से अधिक इकाइयों को प्रोत्सान राशि वितरित की।
  •          मध्यप्रदेश के सफल उद्यमियों की विकास गाथा पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 137 स्टार्ट-अप को 1.5 करोड़ की सहायता राशि अंतरित की।
  •          मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वृहद उद्योगों को 1274 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई।
  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्यमियों को उद्योग स्थापना के लिए भूमि आवंटन आशय पत्र एवं लोन स्वीकृति-पत्र वितरित किए। इनमें विदिशा, मंदसौर की तीन-तीन इकाइयां शामिल हैं।
  •          प्ले एंड प्लग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एमएसएमई विभाग के बीच स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू किया गया।
  •          मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में कटनी, खरगोन और रायसेन जिले के 4 हितग्राहियों को एक करोड़ 57 लाख रुपए की ऋण राशि प्रदान की गई।
  •          मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत 30 लोगों को रोजगार देने वाली इकाई को सहायता राशि प्रदान की गई।
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