चन्नी के समर्थन में हाईकमान को लिखा पत्र, कांग्रेस में गुटबाजी के चलते CM चेहरे पर घमासान

चंडीगढ़.

पंजाब कांग्रेस में एकजुटता की कोशिश पर गुटबाजी भारी पड़ रही है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल दावा कर रहे हैं कि 2027 में कांग्रेस 2022 वाली गलती नहीं दोहराएगी। कांग्रेस बिना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किए एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। प्रदेश प्रभारी का यह दावा कांग्रेस के बड़े वर्ग को रास नहीं आ रहा है।

यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का विरोधी गुट पूर्व मुख्यमंत्री चरणजी सिंह चन्नी को 2027 के विधानसभा चुनाव का चेहरा बनाना चाहता है। समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी इन दिनों भीतर खाते जोरों पर चल रहा है। चन्नी की अगुवाई के लिए की जा रही लाबिंग के तहत कांग्रेस के 32 जट्ट नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर मिलने के लिए समय भी मांगा है। पत्र दोनों ही नेताओं के दफ्तर में भेजा जा चुका है। 42 से अधिक नान जट्ट नेताओं ने भी हाईकमान से समय मांगने वाले पत्र पर हस्ताक्षर किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पत्र में इन नेताओं ने केवल अपनी बात सुनने की मांग की है।

इस कवायद से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी में बड़ी लड़ाई देखने को मिल सकती है। बेशक प्रदेश प्रभारी के हस्तक्षेप के बाद वड़िंग और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा मुख्यमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग बता रहे हैं, लेकिन चन्नी और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा इस दौड़ में शामिल हैं। दूसरी तरफ अगर हाईकमान विरोधी गुट की बात मानता है तो चन्नी को चुनावी वर्ष में पार्टी की कमान भी सौंपी जा सकती है।

बता दें कि 2022 में भी चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था और फिर उन्हीं के चेहरे पर चुनाव लड़ा था। चन्नी दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़े थे और दोनों ही सीटों पर हार गए थे। हालात यह हुए कि 78 विधायकों वाली कांग्रेस महज 18 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। चन्नी एससी समुदाय से हैं, इसलिए कांग्रेस में यह तर्क दिया गया कि जट्टों ने पार्टी को वोट नहीं डाला। हालांकि दोआबा क्षेत्र में एससी मतदाताओं ने कांग्रेस पर भरोसा जताया, लेकिन मालवा और माझा में कांग्रेस के एससी चेहरे को आगे करने का कोई खास लाभ नहीं मिला। यही कारण है कि बघेल इस बार यह कह रहे हैं कि कांग्रेस 2022 की गलती को नहीं दोहराएगी और पार्टी हाईकमान के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी।

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