वाशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध समेत आठ युद्धों को रोकने के अपने दावे को दोहराया. हालांकि, उन्होंने अपने 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के ऑपरेशन सिंदूर को रोककर 3.5 करोड़ लोगों की जान बचाई थी. ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 3.5 करोड़ लोग मारे गए होते.
ट्रंप का यह बयान भारत के खिलाफ मई 2025 में चार दिवसीय सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के बैकफुट पर होने का स्पष्ट संकेत देता है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, 'अपने पहले 10 महीनों में, कंबोडिया और थाईलैंड समेत मैंने आठ युद्ध रुकवाए. ये मजाक नहीं है. पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध हो सकता था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा कि अगर मैं हस्तक्षेप न करता तो 3.5 करोड़ लोगों की मौत होती.' ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 'स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन' के दौरान अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए ये दावे किए.
ट्रंन ने इन आठ युद्धों को रोकने का किया दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने जिन युद्धों को सुलझाने का दावा किया है, उनमें- इजरायल और हमास, इजरायल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया, भारत और पाकिस्तान, सर्बिया और कोसोवो, रवांडा और कांगो, आर्मेनिया और अजरबैजान, कंबोडिया और थाईलैंड के बीच के संघर्ष शामिल हैं. भारत ने पाकिस्तान के साथ चार दिवसीय संघर्ष के दौरान दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में भूमिका निभाने के ट्रंप के दावों को बार-बार खारिज किया है. संघर्ष को रोकने में ट्रंप की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चुटकी लेते हुए इससे इनकार किया था.
भारत ने ट्रंप के दावे को हर बार किया खारिज
उनसे पूछा गया था कि पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष के दौरान यूएस कहां था? मतलब अमेरिका की क्या भूमिका थी. इस पर कूटनीतिक भाषा में जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा था, 'यूएस, यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका में था.' उनके इस जवाब का मतलब था कि अमेरिका का भारत पाकिस्तान सीजफायर में कोई भूमिका नहीं थी. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी सीजफायर में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को खारिज किया था. उन्होंने कहा था, 'पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (DGMO) ने हॉटलाइन पर अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया और संघर्ष खत्म का अनुरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौता हुआ.'

