लखनऊ
सुभासपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने कहा कि अगर अखिलेश यादव अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे। जेपीएनआईसी के मुद्दे पर भी उन्होंने सपा प्रमुख को घेरते हुए कहा कि अखिलेश यादव को लीज और बिक्री का अंतर नहीं पता है।
'अयोध्या से डर लग रहा तो जहूराबाद से चुनाव लड़ें अखिलेश'
राजभर ने कहा कि अयोध्या से चुनाव लड़ने के लिए अखिलेश यादव ने खुद चुनौती दी थी और अब मुख्यमंत्री ने उसे स्वीकार कर लिया है। अब अखिलेश को अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाना चाहिए। राजभर ने दावा किया कि वहां चुनाव लड़ने पर अखिलेश यादव की जमानत जब्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश अयोध्या से चुनाव नहीं लड़ना चाहते तो जहूराबाद आकर उनसे मुकाबला कर सकते हैं।
'200 करोड़ का प्रोजेक्ट 865 करोड़ तक पहुंचा, फिर भी अधूरा'
जेपीएनआईसी को बेचने के आरोप पर राजभर ने अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि परियोजना की शुरुआती लागत 200 करोड़ रुपये थी, जो सपा सरकार के कार्यकाल में बढ़कर 865 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, लेकिन परियोजना पूरी नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि जेपीएनआईसी के आठ सदस्यों में सात अखिलेश यादव के करीबी थे और अखिलेश यादव खुद भी उसमें शामिल थे। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि संस्थान के होटल, क्लब और आय के अन्य स्रोतों पर अखिलेश यादव और उनके परिवार के लोगों का प्रभाव था।

राजभर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जेपीएनआईसी को 30 साल की लीज पर दिया है। उन्होंने अखिलेश यादव के इसे बेचे जाने के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा कि लीज पर देने और संपत्ति बेचने में अंतर होता है।
'अखिलेश अपने पांच साल के कार्यकाल को देखें'
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़ और इस मामले में उत्तर प्रदेश के लोगों को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी पर राजभर ने कहा कि सपा प्रमुख को अपने पांच साल के शासनकाल को भी देखना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई पुलिस के साथ बदसलूकी करेगा तो क्या पुलिस उस पर फूल बरसाएगी? राजभर ने कहा कि पुलिस को अपनी सुरक्षा के साथ-साथ देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभानी होती है।
