रांची
झारखंड हाईकोर्ट में जेएसएससी-सीजीएल नियुक्ति रद करने के मामले में राज्य सरकार की ओर से बहस पूरी कर ली गई है। सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं, JPSC से संबंधित मामले में कल फिर सुनवाई जारी रहेगी। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।
नियुक्ति रद करने के फैसले को सरकार ने ठहराया था सही
JSSC CGL नियुक्ति रद करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट अदालत में पेश की गई थी।
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने नियुक्ति रद करने के फैसले को उचित ठहराया था। सरकार की ओर से परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितता और वित्तीय लेन-देन का हवाला दिया गया था। सरकार की ओर से बताया गया था कि मामले में 28 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच अभी जारी है।

सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई थी कि ऐसी स्थिति में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं है। राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात CID की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर CGL समेत अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद करने के फैसले का पक्ष रखा था।
याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा रद करने का किया विरोध
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद करने का विरोध किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा था कि प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं है। उनके अनुसार किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने नहीं आई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि मामला संभावित प्रश्नों की परीक्षा से पहले जानकारी मिलने का हो सकता है। नेपाल में 28 अभ्यर्थियों द्वारा संभावित प्रश्नों को याद किए जाने और उनमें से 10 के सफल होने का भी उल्लेख किया गया था। इन अभ्यर्थियों का परिणाम हाई कोर्ट के आदेश से रोका गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था।
दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील भी दी गई कि पहले की न्यायिक कार्यवाही में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने की बात कही गई थी। नियुक्ति को आपराधिक मामले की स्थिति के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि SIT की जांच दो साल से अधिक समय से चल रही है, लेकिन अब तक चार्जशीट नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष।
अन्य अधिवक्ताओं की ओर से भी कहा गया कि CGL मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से पहले ही आदेश दिए जा चुके हैं। उनके अनुसार दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करने तथा आपराधिक मामले के आधार पर नियुक्ति को लेकर निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद सरकार की ओर से पूरी प्रक्रिया को फिर रद किया गया।
अब सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने JSSC CGL नियुक्ति रद करने के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं, JPSC से संबंधित मामले में कल फिर सुनवाई होगी और राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।
