Headlines

हाई कोर्ट ने पादरी को दी फटकार: अपने धर्म को सच बताना संविधान के खिलाफ माना

 इलाहाबाद

धर्मों को लेकर बड़ी टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि कई भी धर्म यह दावा नहीं कर सकता कि केवल वही सच है। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए एक पादरी की याचिका खारिज कर दी। पादरी पर जान-बूझकर धार्मिक भावनओं को आहत करने के आरोप लगे थे। पादरी ने खुद के खिलाफ फाइल की गई चार्जशीट के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया था।

यूपी के मऊ जिले में मुहम्मदाबाद थाने में 2023 में पादरी के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उनपर आरोप था कि प्रार्थना सभा के दौरान वह कहते थे कि इस संसार में केवल एक ही धर्म सत्य है और वह है ईसाई धर्म। जस्टिस सौर्भ श्रीवास्तव की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा, भारत ऐसा देश है जहां हर धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। भारत का संविधान कहता है कि भारत के सेक्युलर देश है। ऐसे में यह दावा कतई नहीं किया जा सकता कि कोई एक धर्म ही श्रेष्ठ और सत्य है।

बेंच ने कहा कि आईपीसी की धारा 295-ए के तहत अगर किसी भी धर्म को नीचा दिखाने की कोशिश की जाती है तो इसे अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे में पादरी ने जो कुछ कहा उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि पादरी के बयानों पर कोई केस नहीं बनता है।

पादरी के वकील ने कहा कि केवल उन्हें परेशान करने के लिए यह केस बनाया जा रहा है। उनपर आरोप लगाया गया है कि वह दूसरे धर्मों को नीचा दिखाते हैं और फिर पिछड़े लोगों का धर्मांतरण करने का प्रयास करते हैं जो कि निराधार है। उन्होंने दावा किया कि जांच अधिकारी ने भी यही पाया था कि वह किसी का धर्मांतरण नही करवाते हैं।

वकील ने कहा कि बिना निष्पक्ष जांच के ही जांच अधिकारी ने रिपोर्ट फाइल करदी। ऐसे में कानून के साथ भी खिलवाड़ किया गया है। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज केस को रद्द कर दिया जाना चाहिए। वहीं सरकारी वकील ने उनका विरोध किया। जस्टिस श्रीवास्तव की बेंच ने कहा, समन या फिर संज्ञान के लिए प्रथम दृष्ट्या जानकारी की जरूरत होती है और इसपर मैजिट्रेट विचार कर सकते हैं। वर्तमान परिस्थितियों और सबूतों को देखते हुए यह याचिका खारिज की जाती है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *