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सलकनपुर देवी लोक में पहली बारिश बनी परीक्षा, रिसाव, जलभराव और सूखे पौधों ने बढ़ाई चिंता

सलकनपुर 
 सीहोर जिले के प्रसिद्ध देवीधाम सलकनपुर में महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किए जा रहे देवी लोक की महत्वाकांक्षी परियोजना पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 97 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस परिसर में कई स्थानों पर पानी का रिसाव, जलभराव और अव्यवस्थाएं सामने आई हैं।

सूख चुके पौधे, अधूरे निर्माण और खराब रखरखाव ने परियोजना की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित सुविधाएं अभी तक जमीन पर नजर नहीं आ रही हैं।

पहली बारिश में उजागर हुई निर्माण की स्थिति
करीब 90.35 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए सिविल कार्यों में पहली ही बारिश के दौरान 64 योगिनी मंदिर के स्तंभों के किनारों से पानी रिसता दिखाई दिया। कई हिस्सों में जलभराव भी देखने को मिला, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक, देवी लोक परियोजना के तहत करीब 90.35 करोड़ रुपये की लागत से सिविल निर्माण कराया गया है. परिसर में बनाए गए 64 योगिनी मंदिरों के पिलरों के किनारों से पहली ही बारिश में पानी रिसने लगा. इससे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ऐसी स्थिति चिंताजनक है। 

444 पौधे लगाए, 80 प्रतिशत सूख गए
परिसर को हराभरा बनाने के उद्देश्य से ट्री-गार्ड सहित 444 पौधे लगाए गए थे। बताया गया कि प्रत्येक पौधे पर करीब 1,800 रुपये खर्च किए गए. हालांकि, उचित देखरेख के अभाव में इनमें से लगभग 80 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण और सौंदर्यीकरण के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मणिदीप में जलभराव, फिसलने का खतरा
देवी लोक के मणिदीप क्षेत्र में लगाए गए बंसी पहाड़पुर पत्थरों पर पहली ही बारिश में पानी जमा हो गया. यदि जल निकासी की व्यवस्था जल्द नहीं सुधारी गई तो यहां आने वाले श्रद्धालुओं के फिसलने और हादसों का खतरा बना रह सकता है। 

प्रतिमा स्थापना का इंतजार, रखरखाव भी सवालों में
परियोजना के प्रमुख आकर्षण आदिशक्ति पेडस्टल पर अब तक देवी प्रतिमा स्थापित नहीं हो सकी है. निर्माण एजेंसी ने जुलाई के अंतिम सप्ताह तक प्रतिमा स्थापना का आश्वासन दिया था. लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है.परियोजना का निर्माण पूरा होने के बाद तीन वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी निर्माण एजेंसी की है. इसके बावजूद धर्मशाला, मार्केट और मेला ग्राउंड क्षेत्र में कीचड़, कचरा और अव्यवस्था साफ दिखाई दे रही है. परिसर की कई हाईमास्ट लाइटें भी बंद पड़ी हैं, जबकि कुछ झूलती हुई नजर आ रही हैं.रायसेन जिले के उदयपुरा से आए श्रद्धालु रमेश कुमार धाकड़ ने बताया कि वे अक्सर यहां भंडारा कराने आते हैं, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पर्याप्त रोशनी और बेहतर व्यवस्थाएं नहीं मिल रही हैं। 

97 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना
वहीं, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यपालन यंत्री मनीषा भारती ने कहा कि उन्हें पानी टपकने और पौधों के सूखने की जानकारी मिली है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्थल का निरीक्षण किया जाएगा. जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा. फिलहाल पहली ही बारिश में सामने आई इन खामियों ने 97 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना की गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

पौधरोपण और रखरखाव पर भी उठे सवाल
परिसर को हराभरा बनाने के लिए 444 पौधे लगाए गए थे, लेकिन पर्याप्त देखरेख नहीं होने के कारण अधिकांश पौधे सूख चुके हैं। जानकारी के अनुसार प्रति पौधे पर हजारों रुपये खर्च किए गए, फिर भी हरियाली का उद्देश्य अधूरा दिखाई दे रहा है। वहीं, निर्माण एजेंसी पर तीन वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी होने के बावजूद परिसर के कई हिस्सों में कीचड़, कचरा और अव्यवस्था बनी हुई है।

 

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