नई दिल्ली
FIH वर्ल्ड कप के लिए भारत की महिला और पुरुष हॉकी टीम्स की जर्सी में बड़ा बदलाव देखने को मिला. जर्सी का रंग परंपरागत नीला की जगह केसरिया कर दिया गया है, ऐसे में हॉकी इंडिया का ये फैसला लगातार विवादों में घिरता जा रहा है. अब इस मामले में हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और भारत के पूर्व कप्तान दिलीप तिर्की ने ही अपनी संस्था के फैसले पर सवाल उठा दिए हैं.
दिलीप तिर्की ने हॉकी इंडिया के एग्जीक्यूटिव बोर्ड को ईमेल भेजकर कहा कि राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग बदलने का फैसला उनकी जानकारी के बिना लागू कर दिया गया. इतना ही नहीं, इस मुद्दे पर एग्जीक्यूटिव बोर्ड से भी कोई चर्चा नहीं की गई.
अपने ईमेल में दिलीप तिर्की ने साफ लिखा, 'राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग बदलने का फैसला एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सामने चर्चा के लिए नहीं लाया गया और ना ही मुझे पहले इसकी जानकारी दी गई.'उन्होंने कहा कि उनकी आपत्ति जर्सी के रंग से नहीं है, बल्कि इस बात से है कि राष्ट्रीय टीम की पहचान से जुड़े इतने महत्वपूर्ण फैसले को तय प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लागू कर दिया गया.'

दिलीप तिर्की ने लिखा कि ऐसे फैसलों पर पहले निर्वाचित नेतृत्व और एग्जीक्यूटिव बोर्ड के साथ चर्चा होनी चाहिए थी. यही किसी भी राष्ट्रीय खेल महासंघ की स्वस्थ प्रशासनिक परंपरा है. हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ने महासंघ के कार्यकारी निदेशक कमांडर आरके श्रीवास्तव को अलग से ईमेल भेजकर निर्देश दिया कि 31 जुलाई शाम 5 बजे तक सभी एग्जीक्यूटिव बोर्ड सदस्यों को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाए.
उन्होंने तीन अहम सवालों के जवाब मांगे हैं-
♦ जर्सी का रंग बदलने की मंजूरी किसने दी?
♦ इस फैसले में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे?
♦ अध्यक्ष और एग्जीक्यूटिव बोर्ड से सलाह क्यों नहीं ली गई?
भारतीय हॉकी टीम की नई भगवा जर्सी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई. कई लोगों ने इसे टीम इंडिया की पारंपरिक पहचान से जोड़कर सवाल उठाए, जबकि कुछ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं. हालांकि हॉकी इंडिया लगातार यह कहता रहा कि जर्सी का नया डिजाइन पूरी तरह खेल और डिजाइन संबंधी फैसला है, इसका किसी राजनीतिक या अन्य उद्देश्य से कोई संबंध नहीं है.
ओडिशा सरकार ने भी मांगा जवाब?
दिलीप तिर्की ने अपने पत्र में यह भी खुलासा किया कि इस विवाद को लेकर ओडिशा सरकार ने भी उनसे जवाब मांगा था. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक तौर पर उन्होंने हमेशा यही स्पष्ट किया कि यह फैसला खेल से जुड़ा है, ताकि खिलाड़ियों का ध्यान आगामी वर्ल्ड कप से ना भटके. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी माना कि प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है.
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब हॉकी इंडिया पहले से प्रशासनिक मामलों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहा है. हाल ही में पूर्व भारतीय कप्तान और हॉकी इंडिया की उपाध्यक्ष असुंता लाकड़ा ने महासचिव भोला नाथ सिंह पर धमकी देने का आरोप लगाया था. लाकड़ा का आरोप था कि उन्होंने एक कोच के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत उठाई थी, जिसके बाद उन्हें प्रताड़ित किया गया.
इसके बाद युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया को निर्देश दिया कि मामले को आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास भेजा जाए और स्वतंत्र जांच कराई जाए. इसके अलावा भी हॉकी इंडिया पर उत्पीड़न से जुड़े मामलों को संभालने के तरीके को लेकर सवाल उठते रहे हैं.
