Digvijaya Singh ने खुद को बताया घोर सनातनी, बोले- एकादशी उपवास से लेकर नर्मदा परिक्रमा तक निभाई परंपरा

इंदौर 

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह  इंदौर में थे, वे जब रेसीडेंसी कोठी में विधायक उषा ठाकुर से मिले तो दोनों में मीठी नोक झोंक हुई। ठाकुर ने भोजशाला के फैसले पर कुछ कहा कि तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं घोर सनातन धर्म को मानने वाला हुं। मैने नर्मदा परिक्रमा है। एकादशी का उपवास करता हुं। उषा ने कहा कि आप पक्के सनातनी है तो सार्वजनिक रुप से स्वीकार करना चाहिए। भोजशाला को लेकर जो फैसला आया है। उसका आपको सम्मान करना चाहिए। तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि तुम्हें कैसे मान लिया कि मैंने फैसले का विरोध किया है। 

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक दिवसीय दौरे पर इंदौर पहुंचे। वे पूर्व विधायक अश्विन जोशी के निधन पर शोक प्रकट करने उनके निवास पर पहुंचे। इसके बाद वे अन्य कार्यकर्ता व नेतागणो से भी मिले।

मीडिया से चर्चा के दौरान सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में अच्छे दिन लाने का वादा किया था, लेकिन आज आम जनता महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जिससे गरीब और अधिक गरीब होता जा रहा है, जबकि कुछ चुनिंदा लोग लगातार अमीर बनते जा रहे हैं।

सिंह ने कहा कि पहले भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस पर लोगों का मंगलसूत्र छीनने जैसे आरोप लगाए जाते थे, लेकिन अब जनता को सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्रा नहीं करने और तेल कम उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और रुपये की कीमत में ऐतिहासिक गिरावट आई है। बेरोजगारी कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है।

नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और घोटालों को लेकर भी सिंह ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में धांधली रोकने के लिए समिति द्वारा विस्तृत रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन सरकार ने उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप था कि बार-बार सामने आ रहे घोटाले युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा धोखा हैं।
 
भोजशाला मामले में इंदौर हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि फैसले का अध्ययन किया जाएगा और आगे की कार्रवाई कानून व संविधान के दायरे में रहकर ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि भोजशाला एक एएसआई संरक्षित स्थल है और वहां पूजा-अनुष्ठान को लेकर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।

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