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बिहार के 3 प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए बनेगा डिजिटल लैंड बैंक, जमीन रिकॉर्ड से खरीद तक होगी निगरानी

पटना
 बिहार में प्रस्तावित तीन ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया अब तेज होगी। सोनपुर (सारण), भागलपुर और मुंगेर में एयरपोर्ट के लिए जमीन की संयुक्त मापी, स्वामित्व की जांच और सीधे खरीद की प्रक्रिया में सहयोग के लिए सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे।

नागरिक विमानन विभाग ने इसके लिए योग्य और अनुभवी कंसल्टेंसी फर्मों से प्रस्ताव मांगे हैं। सलाहकार जमीन के रिकॉर्ड से लेकर निबंधन और दाखिल-खारिज तक की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

जमीन की खरीद से डिजिटल लैंड बैंक तक होगा काम
चयनित कंसल्टेंसी फर्म को केवल जमीन की पहचान तक सीमित नहीं रहना होगा। वह जमीन के रिकॉर्ड की जांच, स्वामित्व सत्यापन, सीधे जमीन खरीद में सहयोग, निबंधन और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में भी मदद करेगी।

इसके साथ ही तीनों प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए डिजिटल लैंड बैंक तैयार करने की जिम्मेदारी भी सलाहकार की होगी।

गुणवत्ता और लागत के आधार पर होगा कंसल्टेंट का चयन
नागरिक विमानन विभाग के अनुसार कंसल्टेंट का चयन गुणवत्ता एवं लागत आधारित चयन पद्धति से किया जाएगा। इसमें तकनीकी प्रस्ताव को 70 प्रतिशत और वित्तीय प्रस्ताव को 30 प्रतिशत अंक दिए जाएंगे।

निविदा में भाग लेने की प्रक्रिया 30 सितंबर से शुरू हो चुकी है। इच्छुक एजेंसियां 22 अक्टूबर तक अपना प्रस्ताव जमा कर सकेंगी।

15 अक्टूबर को होगी प्री-बिड बैठक
विभाग की ओर से 15 अक्टूबर को प्री-बिड बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें इच्छुक कंसल्टेंसी फर्म निविदा से जुड़े बिंदुओं पर जानकारी ले सकेंगी।

तकनीकी प्रस्ताव 23 अक्टूबर को नागरिक विमानन विभाग के कार्यालय में खोले जाएंगे। तकनीकी रूप से योग्य पाए जाने वाले कंसल्टेंटों के वित्तीय प्रस्ताव बाद में खोले जाएंगे।

जमीन के कागजात से खरीद तक निगरानी
चयनित कंसल्टेंट को जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करनी होगी। स्वामित्व स्पष्ट करने के बाद जमीन की खरीद और निबंधन की प्रक्रिया में सहयोग किया जाएगा।

इसके बाद दाखिल-खारिज समेत अन्य जरूरी राजस्व प्रक्रियाओं को पूरा कराने में भी कंसल्टेंसी फर्म मदद करेगी।

तीन शहरों में एयरपोर्ट की जमीन पर फोकस
सोनपुर, भागलपुर और मुंगेर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाना इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य लक्ष्य है। विभाग की ओर से जमीन की मापी से लेकर डिजिटल लैंड बैंक तैयार करने तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की तैयारी की जा रही है। कंसल्टेंट की नियुक्ति के बाद तीनों परियोजनाओं के लिए जमीन संबंधी काम को गति मिलने की उम्मीद है।

 

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