मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करेगा सुमन रोडमैप-2030: ब्रजेश पाठक
डिप्टी सीएम ने सुरक्षित मातृत्व आश्वासन द्विदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को किया संबोधित
डिप्टी सीएम नेकहा- महिलाओं-नवजातों को समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

लखनऊ
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने तथा महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है।
लखनऊ में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘सुमन रोडमैप-2030’ के अंतर्गत दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य नेतृत्व का एक साथ आना केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में साझा संकल्प है।
उन्होंने कहा कि कार्यशाला में विभिन्न राज्यों द्वारा मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया जा रहा है। इससे राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ एवं नवजात मृत्यु को रोकना केवल स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रत्येक मां, नवजात शिशु और परिवार का जीवन जुड़ा हुआ है। सुरक्षित प्रसव के साथ-साथ गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल, प्रसव के बाद नवजात और माताओं की निगरानी तथा समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के प्रत्येक जनपद में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रत्येक स्वास्थ्य इकाई पर विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य व्यवस्था की ताकत
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में तकनीक और आंकड़े स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के महत्वपूर्ण साधन हैं। स्वास्थ्य संबंधी उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर उपयोग करते हुए समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी। सुमन रोडमैप के माध्यम से गर्भावस्था में जोखिम की पहचान तथा विभिन्न स्तरों पर होने वाली देरी के विश्लेषण जैसे नए उपायों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ-साथ आशा कार्यकर्ता, एएनएम, नर्स, चिकित्सक और अग्रिम पंक्ति के सभी स्वास्थ्यकर्मी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक ताकत हैं। मातृ स्वास्थ्य को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित रखकर अपेक्षित लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते। परिवार नियोजन, पोषण, एनीमिया नियंत्रण, महिला एवं बाल विकास, पंचायतों और समुदाय की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
सभी राज्य करें अनुभव साझा
डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें प्रत्येक गर्भवती महिला को अलग-अलग योजनाओं और कार्यक्रमों के बीच भटकना न पड़े, बल्कि उसे एकीकृत एवं निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने देश के सभी राज्यों से अपने अनुभव साझा करने और ‘सुमन रोडमैप-2030’ को अपनी-अपनी परिस्थितियों के अनुरूप ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि जब कोई लाभार्थी स्वास्थ्यकर्मी या स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचे तो उसे सही सेवा, समय पर, निःशुल्क और पूरी गरिमा के साथ मिले। यही सुमन की भावना और निरंतर स्वास्थ्य देखभाल का मूल उद्देश्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला से प्राप्त सुझावों एवं अनुभवों के आधार पर एक मजबूत, व्यावहारिक एवं परिणामोन्मुख सुमन रोडमैप-2030 तैयार होगा, जो मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इनकी रही उपस्थिति
इस अवसर पर अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन आराधना पटनायक जी, संयुक्त सचिव, (आरसीएच) मीरा श्रीवास्तव जी, अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग) उत्तर प्रदेश सरकार अमित कुमार घोष जी, सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन रितु माहेश्वरी जी, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश सरकार डॉ० पिंकी जोएल जी, आयुक्त एवं सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, ओडिशा सरकार अश्वती एस० जी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
