रांची
रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ झारखंड सरकार के ग्रुप ऑफ मिनिस्टर ने रविवार को दूसरे दौर की बातचीत की। बैठक के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मीडिया को संबोधित किया और बताया कि सरकार जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द नहीं कर सकती। हालांकि जेपीएससी-पीटी परीक्षा रद्द करने पर सहमति बनी है।
हालांकि उन्होंने बताया कि 14 जेपीएससी और 23 और 25 के बैकलॉग की जांच दो तरीके से होगी। ईडी वित्तीय अनियमिताओं की जांच करेगी जबकि आपराधिक मामलों की जांच सीआईडी करेगी। वहीं छात्र सीबीआई जांच करवाने के लिए अड़े हुए हैं। बैठक के बाद छात्र नेताओं ने कहा है कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। छात्र नेताओं ने कहा कि वे 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक मार्च करेंगे।

बैठक में किन-किन मांगों पर बनी सहमति?
सुदिव्य कुमार सोनू ने आगे बताया कि 'सीआईडी की जांच में मॉनिटरिंग के लिए सेवानिवृत्त जजों की एक कमेटी बनाई जाएगी। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा सरकार रद्द नहीं कर सकती, क्योंकि परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ली गई है। रिफॉर्म (परीक्षा में सुधार) के लिए आईआईएम और एक्सएलआरआई से गाइडेंस लिया जाएगा।'
उन्होंने कहा कि 'फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा और 90 दिनों के अंदर चार्जशीट जमा की जाएगी। रिफॉर्म के मुद्दे पर आईआईटी-आईएसएम, आईआईएम रांची और एक्सएलआरआई के विशेषज्ञों की एक केमिटी बनाकर रिफॉर्म किया जाएगा। छात्र प्रतिनिधियों की एक मांग यह भी थी कि सीजीएल की परीक्षा को रद्द किया जाना चाहिए सरकार का साफ कहना था कि चूंकि यह परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई है इसलिए सरकार इसे रद्द करने में सक्षम नहीं है।'
तीन बड़ी परीक्षाएं रद्द होने के आसार
पिछले सोलह दिनों से गूंज रहा नारा अब सरकार की नींदे उड़ाने लगा है। झारखंड में परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर सड़क पर उतरे छात्रों का धैर्य सरकार की बेचैनी बढ़ा रहा है। बताया जा रहा है कि हेमंत सोरेन सरकार आज छात्रों के साथ हुई बातचीत के बाद तीन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला ले सकती है। ये तीन परीक्षाएं झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी की 2023 और 2025 की परीक्षा और साथ ही 14वीं प्रारंभिक परीक्षा हो सकती है।
यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है जब रांची में आंदोलन रविवार को अपने सोलहवें दिन में दाखिल हो चुका है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। एक अन्य आंदोलनकारी छात्र राहुल क्रांति भी अनशन पर हैं और फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में रखे गए हैं। कुल मिलाकर छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं, जिससे प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा
JPSC के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा ने इस्तीफा दे दिया है. तीनों ने अपना इस्तीफा राज्यपाल संतोष गंगवार को भेजा था, जिसे मंजूर कर लिया गया है. इसी बीच CID 10 अगस्त को अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ करेगी. भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के सिलसिले में उनसे सवाल किए जाएंगे. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर छात्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
इस्तीफा देने वालों में अजीता भट्टाचार्य, जमील अहमद और अनिमा हांसदा शामिल हैं. तीनों ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेजा था. राज्यपाल ने इसे मंजूर कर लिया है. इससे पहले 22 जुलाई को JPSC चेयरपर्सन एल खियांग्ते भी इस्तीफा दे चुके थे. फिलहाल, JPSC की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की CID जांच कर रही है. इसी सिलसिले में आयोग के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है. अब 10 अगस्त को डॉ. अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ होनी है।
आंदोलन शांत कराने के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की लंबी बातचीत हुई. मुख्यमंत्री ने खुद छात्रों को चिट्ठी लिखकर भरोसा दिलाने की कोशिश की. सरकार का दावा है कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं. इसके बावजूद कई मुख्य मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
बीते दो दिनों की बातचीत रही बेनतीजा
गौरतलब है कि इससे पहले पिछले दो दिनों की बातचीत बेनतीजा रही थी, जिसके बाद आज दोबारा सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बैठक बुलाई गई। इस बैठक में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए यह संकेत दिया कि परीक्षा गड़बड़ियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी से कराने पर भी विचार किया जा सकता है। यानी अब मामला सिर्फ राज्य स्तर की जांच तक सीमित नहीं रह जाएगा, बल्कि केंद्रीय एजेंसी भी इसमें शामिल हो सकती है।
बारीकी से होगी जांच
एनडीटीवी की रिपोर्ट की मानें तो लखनऊ स्थित निजी परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी टीडीपीएल द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इसके अलावा जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी में सुधार लाने के मकसद से सरकार आईआईएम और एक्सआईएसएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की मदद लेने की योजना बना रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों की गुंजाइश ही न बचे। पिछले कुछ दिनों में राज्य सरकार ने अलग-अलग छात्र संगठनों के साथ कई दौर की बातचीत की है, जिसमें कांग्रेस के छात्र विंग एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ शामिल रहे हैं। इसी कड़ी में आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पत्रकारों से बातचीत में एक भावुक और तीखा बयान भी दिया।
सोरेन ने कहा, "आज जब यह सरकार मजबूती से खड़ी हो रही है, तो कई लोग हैं जो इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। वे चेहरे छुपाकर, रूप बदलकर, या पर्दे के पीछे से भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। हर समस्या का हल बातचीत में है, डंडे और गोली में नहीं।" उन्होंने आगे कहा कि डंडे और गोलियां सीमाओं के लिए, दुश्मनों से निपटने के लिए होती हैं, अपने ही लोगों पर बल प्रयोग से कुछ हासिल नहीं होता। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी भावनाएं और चिंताएं सरकार की भी चिंता हैं, और इस संवैधानिक पद पर बैठकर वे पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करेंगे। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की तरफ इशारा थी।
बढ़ता जा रहा है जांच का दायरा
इस बीच जांच का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जेपीएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के सिलसिले में अब तक उन्नीस लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि आयोग की पूर्व अध्यक्ष एल खियांगते से 28 जुलाई के बाद से चार बार पूछताछ की जा चुकी है। ऐसे में साफ है कि झारखंड का यह छात्र आंदोलन अब सिर्फ एक परीक्षा रद्द कराने की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र में बड़े बदलाव की मांग बनकर उभर आया है।
सरकार ने छात्रों को दिया रिटायर्ड जज वाला विकल्प मगर…
मंत्री ने आगे बताया कि ‘सरकार यही कर सकती है कि एक रिटायर्ड जज अध्यक्षता में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाकर इस जांच की मॉनटरिंग कर दे। जिसे छात्र ने मानने से इनकार कर दिया। हम यह समझते हैं कि 98 फीसदी बिंदूओं (छात्रों की मांग) पर सरकार ने सहमति दी है। दो फीसदी बिंदू जो बचे हैं जो सिर्फ और सिर्फ सीजीएल की परीक्षा को रद्द करने के थे और सरकार का स्पष्ट कहना है कि जो माननीय कोर्ट के आदेश पर परीक्षा ली गई हैं परिणाम प्रकाशित हो चुके हैं और सफल उम्मीदवार पहले से ही नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में सरकार उन्हें अपनी तरफ से रद्द नहीं कर सकती है। सरकार छात्रों में विश्वास जगाने के लिए सीआईडी के ऊपर एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने को तैयार थी कि यदि अगर सीआईडी आपकी बातों को नहीं सुनती है तो रिटायर्ड जज का एक विकल्प हम आपको दे रहे हैं जहां आप अपनी बातों को रख सकेंगे।’
अनियमितताएं, घोटाला के आरोप लगा रहे छात्र प्रदर्शनकारी
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर बड़ी संख्या में छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे रहे हैं। छात्रों की मांग थी कि 14वीं जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल एग्जाम में जो भारी अनियमितताएं, घोटाला हुआ है लिहाजा इन्हें रद्द किया जाए।
