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बिहार में बाढ़ और सिंचाई की समस्या पर बड़ा प्लान, नेपाल के पानी और बांध परियोजनाओं पर केंद्र से मंथन

पटना
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान नेपाल के पानी से लेकर बिहार के बजट और पर्यटन विकास के मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में भारत-नेपाल जल एवं बांध परियोजनां पर विस्तार से चर्चा की गई। बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राज्यसभा सांसद संजय झा भी इस बैठक में मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गुरुवार शाम को पटना से दिल्ली पहुंचे थे। शुक्रवार सुबह वह राष्ट्रीय राजधानी में मोदी सरकार के मंत्रियों निर्मला सीतारमण और एस जयशंकर के साथ अहम बैठक में शामिल हुए।

सीएम ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास, राज्य की समृद्धि और जनहित से जुड़े विषयों को उन्होंने केंद्र के सामने मजबूती से रखा है। यह बैठक काफी महत्वपूर्ण रही। केंद्र और राज्य सरकार समन्वय के साथ आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रही है।

कोसी-मेची लिंक परियोजना पर फोकस
दरअसल, बिहार सरकार नेपाल से आने वाली नदियों की बाढ़ को रोकने के लिए जल प्रबंधन और किसानों को खेती के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की परियोजनाओं पर फोकस कर रही है। केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई परियोजना के तहत कोसी-मेची इंट्रा स्टेट लिंक परियोजना के लिए केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी थी।

वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते बुधवार को सुपौल जिले के छातापुर ब्लॉक स्थित चैनपुर गांव में निर्माणाधीन कोसी-मेची इंटर-स्टेट नदी लिंक परियोजना का निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखते हुए तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने का निर्देश भी दिया।

सीमांचल को मिलेगा सिंचाई का पानी
सरकार के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 6282.32 करोड़ रुपये का है। इसका उद्देश्य सीमांचल के चार जिलों (अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार) में 214813 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराना है। इसमें अररिया में 69,642 हेक्टेयर, पूर्णिया में 69,970 हेक्टेयर, किशनगंज में 39,548 हेक्टेयर और कटिहार में 35,653 हेक्टेयर
जमीन को सिंचाई की अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी।

इस प्रोजेक्ट के तहत, कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को एक लिंक नहर के जरिए मेची नदी में भेजा जाएगा। इस प्रोजेक्ट को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पूर्वी कोसी मुख्य नहर की पानी ले जाने की क्षमता 15000 क्यूसेक से बढ़ाकर 20000 क्यूसेक की जाएगी। इस परियोजना के अंतर्गत चार शाखा नहरें, 6 वितरिकाएं और अन्य आवश्यक नहर प्रणालियां बनाई जाएंगी।

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