पटना
बिहार में टीआरई-4 में अब 33274 शिक्षकों की नियुक्ति होगी। टीआरई-4 के लिए 886 नए पदों की अधियाचना समान्य प्रशासन विभाग द्वारा बीपीएससी को भेज दी गयी है। इसके पहले शिक्षा विभाग ने टीआरई-4 के लिए 886 नये पदों की अधियाचना सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी थी। यह जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि यह इस साल की अंतिम रिक्ति है।
वे सोमवार को अपने सरकारी कक्ष में पत्रकारों से बात कर रहे थे। मंत्री ने बताया कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। विभाग के सचिव, विशेष सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष और पटना डीएम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कहा कि छात्रों के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। वे किसी प्रकार की समस्या लेकर हमारे पास आ सकते हैं। वे खुद उनकी समस्याओं को सुनते हैं।
मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग की परीक्षा प्रणाली से कोई संबंध नहीं है। विभाग की भूमिका सिर्फ अधियाचना तक है। परीक्षा लेने की जिम्मेवारी बिहार लोक सेवा आयोग की है। आयोग पहले ही निर्णय ले चुका है कि ऐसी परीक्षा दो चरणों में होगी। ऐसे में इसके लिए विभाग को दोष देना उचित नहीं। हमारे पास बीपीएससी परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों की सूची आएगी और हम उन्हें तत्काल नियुक्ति पत्र देंगे। उन्होंने परीक्षार्थियों को भड़काने वालों को चेतावनी दी। कहा कि उन्हें इसका फल भुगतना पड़ेगा।
886 नये पदों की अधियाचना गई

बांगला: 90, ललित कला: 21, नृत्य: 164, मैथिली: 193, अरबी: 20, फारसी: 36, विशेष विद्यालय अध्यापक: 88, पाली: 38, प्राकृत: 63, भोजपुरी: 69, मगही: 28, कृषि: 76 ।
विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष पद के लिए भेजा अनुरोध पत्र
इधर राज्य सरकार ने परीक्षा तंत्र में व्यापक सुधार के लिए गठित होने वाली विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष पद के लिए पटना हाईकोर्ट को अनुरोध पत्र भेज दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि जल्द समिति गठन को लेकर अध्यक्ष पद के लिए पटना हाईकोर्ट के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नामित किए जाने का अनुरोध किया गया है। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा अध्यक्ष नामित किए जाने के बाद
विशेषज्ञ समिति के अन्य चार सदस्यों को नामित किया जाएगा।
राज्य सरकार ने एक दिन पूर्व बिहार में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति के गठन को लेकर अधिसूचना जारी किया है। इस अधिसूचना में विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश से अनुरोध किए जाने का प्रावधान किया गया है। मालूम हो कि, विशेषज्ञ समिति द्वारा गठन के बाद तीन माह के अंदर अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपनी है।
