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पूर्व मध्य रेलवे के जीएम का बड़ा एलान, राजेंद्र सेतु के समानांतर बना पुल बनेगा ट्रेनों के लिए गेम चेंजर

पटना
बिहार के रेल यात्रियों के लिए एक गुड न्यूज है। मोकामा में गंगा नदी पर राजेंद्र सेतु के समानांतर बन रहे नए दो लेन पुल से ट्रेनों की आवाजाही जून में शुरू हो जाएगी। इस पुल के चालू होने से दानापुर और सोनपुर मंडल के बीच ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी। साथ ही दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। इसके बाद पटना से दिल्ली का सफर लगभग 7 घंटे में तय किया जा सकेगा। इसकी जानकारी पूर्व मध्य रेलवे के जीएम छत्रसाल सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए दी।

मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के लिए 'गेम चेंजर' बनेगा नया पुल
जीएम छत्रसाल सिंह ने बताया कि राजेंद्र सेतु के समानांतर बन रहे इस पुल के दोनों ओर रेल फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि झाझा-पटना की ओर से आने-जाने वाली ट्रेनों या राजेंद्र पुल पर चढ़ने वाली गाड़ियों के कारण मेन लाइन का परिचालन बाधित नहीं होगा। यह बुनियादी ढांचा मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों के समयबद्ध परिचालन के लिए 'गेम चेंजर' साबित होने वाला है।
कवच तकनीक से 160 किमी की स्पीड का लक्ष्य
रेल मंत्रालय ने 'मिशन रफ्तार' के तहत दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूट को हाई-स्पीड कॉरिडोर के रूप में चिह्नित किया है। पूर्व मध्य रेलवे के डीडीयू (पंडित दीनदयाल उपाध्याय) से प्रधानखंटा खंड के बीच 294 किलोमीटर के दायरे में अत्याधुनिक 'कवच' सिस्टम लगाने का काम चल रहा है।

पटना से दिल्ली का सफर लगभग 7 घंटे होगा तय: जीएम
छत्रसाल सिंह ने बताया कि अगले एक वर्ष में इस खंड में कवच स्थापित हो जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे (गाजियाबाद से डीडीयू) और पूर्व रेलवे (आसनसोल और हावड़ा मंडल) में भी कवच का काम जारी है। जैसे ही इन तीनों रेलवे जोन में कवच सिस्टम पूरी तरह सक्रिय होगा, पटना होकर दिल्ली से हावड़ा के बीच ट्रेनें 160 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने लगेंगी, जिससे पटना से दिल्ली का सफर लगभग 7 घंटे में तय किया जा सकेगा।

अंडरपास और आरओबी निर्माण से खत्म होंगे फाटक
रेलवे परिचालन को और अधिक सुरक्षित और तेज बनाने के लिए पूर्व मध्य रेल बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रहा है। पूर्व मध्य रेल के जीएम ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 41 जगरों पर अंडरपास और छोटे ओवरब्रिज निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है। अब 71 और जगहों पर ऐसे ही छोटे ओवर ब्रिज और अंडरपास का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है।

 

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