पचमढ़ी में सेब के बागान, गर्म जलवायु में तोड़ा ठंडे इलाके का मिथक, पर्यटकों के लिए नया आकर्षण

नर्मदापुरम
 देश के चुनिंदा हिल स्टेशनों में शामिल पचमढ़ी विभिन्न वैरायटी के आमों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां शासकीय पोलो उद्यान ने नया प्रयोग करके सभी को हैरान कर दिया है. पचमढ़ी में जल्द ही सेब बागान आकर्षण का केंद्र होंगे. क्योंकि यहां हिमाचल प्रदेश के सेब के पौधे लगाकर उत्पादन करने का प्रयोग सफल हो गया है. दो साल पहले गर्म वातावरण में भी फल देने वाले सेब की तीन वैरायटियों के पौधे लगाए गए थे, जिनमें फल आने लगे हैं. जिसका स्वाद अगस्त-सितंबर महीने में पकने पर मिल पाएगा. इसी के साथ ही प्रदेश की दूसरी सरकारी नर्सरियों में भी सेब के पौधे लगाने की तैयारी होगी. वहीं किसानों को पचमढ़ी के उद्यान में पौधे तैयार करके लगाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिससे गर्म वातावरण में पैदा होने वाले सेब किसानों की आय का जरिया बन सकें। 

सभी वातावरण में मिलते हैं फल
पचमढ़ी के शासकीय पोलो उद्यान में लगाए गए 500 पौधों में से 35% फलदार हो गए हैं. वहीं 40% पौधों में फूल लगे हैं, जो जल्द ही फल बनने की प्रक्रिया में पहुंच जाएंगे. दो साल पहले पोलो उद्यान की दो एकड़ जमीन पर हिमाचल प्रदेश की एचआर 99, अन्ना इजरायल और डोरसेट गोल्डन वैरायटी के पौधों का रोपण हुआ था. यह पौधे वहां की प्राइवेट नर्सरियों से लाए गए थे. जो अब चार से पांच फीट तक ऊंचाई के हो गए हैं. सेब की इन वैरियटयों का चुनाव गर्म और सर्द वातावरण में पौधों के पनपने और फल देने के कारण किया गया था. इन वैरायटी के सेब पौधों को ज्यादा ठंडे वातावरण की आवश्यकता नहीं होती है. सामान्य तापमान में भी सेबों की पैदावार होती है. पचमढ़ी के वातावरण में सेब के पौधों की उचित देखभाल और संरक्षण के कारण यह फल देने लगे हैं। 

सेब से मिल सकता है लाखों का मुनाफा
पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर बताया, "शुरुआत के 4 साल बाद एक सेब के पौधे से 25 से 30 किलो तक फल मिल सकते हैं. इसके बाद जैसे-जैसे पौधा बड़े पेड़ का रूप लेगा तब उत्पादन दोगुना हो जाएगा. एचआर 99 प्रजाति के 800 पौधे एक एकड़ में लगाए जा सकते हैं. यदि किसान 1 एकड़ में 500 पौधे लगाकर उत्पादन लेता है तो एक पौधे से 25 किलो के हिसाब से कुल 12500 किलो सेब प्राप्त कर सकता है. जिसका थोक मूल्य 4 से 5 लख रुपए तक जा सकता है। 

सेब लगाने का प्रयोग हुआ सफल
पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर ने बताया, "2 साल पहले पचमढ़ी में सेब के उत्पादन का प्रयोग किया गया था. जो सफल हुआ है. हिमाचल प्रदेश से जो पौधे ले गए थे आज इनमें फूल और फल दोनों लग रहे हैं. प्रदेश में पचमढ़ी का वातावरण हिमाचल के सेब पौधों के लिए उपयुक्त था, क्योंकि यहां गर्मी में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री तक रहता है. सर्दी में एक डिग्री तक तापमान पहुंचता है. मिश्रित वातावरण के कारण सेब का बागान लगाने का प्रयोग सफल हुआ है। 

उन्होंने आगे बताया, "अगस्त में जो फल लगे हैं वह पकना शुरू होंगे. तब यह देखा जाएगा कि कितने पौधों से कितना उत्पादन हुआ. इसके बाद पौधों की संख्या बढ़ाई जाएगी और मैदानी क्षेत्र की नर्सरी और किसानों को भी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे. किसानों को सेब के पौधे और उनका उत्पादन बढ़ाने का उन्नत प्रशिक्षण देने की भी हमारी तैयारी है. भविष्य में पचमढ़ी के साथ कई अन्य स्थानों पर भी सेब के बागान देखने को मिल सकते हैं। 

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