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गाद निकासी से घटेगा बाढ़ का खतरा, जलाशयों की जलधारण क्षमता बढ़ाने की तैयारी

पटना
बिहार की गाद नीति देश के लिए मॉडल बनेगा। गाद नीति बनाने में अव्वल राज्य बिहार से कई राज्यों ने सम्पर्क साधा है। यूपी, ओडिशा, गुजरात जैसे राज्यों ने बिहार के इंजीनियरों से गाद नीति के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी है। जल्द ही इन राज्यों के अभियंता बिहार का दौरा भी करेंगे ताकि वे अपने यहां भी गाद नीति लागू करवा सकें।

राज्य कैबिनेट से गाद नीति लागू होने के बाद हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में बिहार सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के साथ करार किया। अब बिहार में बनने वाले एनएच में राज्य की नदियों की गाद का उपयोग होगा। इस करार के बाद ही कई राज्यों ने सम्पर्क साधा है। देश भर के इंजीनियरों के शीर्ष संगठन इंडियन इंजीनियर्स फेडरेशन (इंडेफ) के अध्यक्ष अविनाश राउल ओड़िशा में जल संसाधन विभाग में मुख्य अभियंता हैं। बिहार की गाद नीति की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इंडेफ के बिहार के नेताओं से इस बारे में जानकारी ली है। इंडेफ के महासचिव व यूपी जल संसाधन विभाग में कार्यपालक अभियंता आशीष यादव ने भी जानकारी ली। इंडेफ से जुड़े देश के अन्य राज्यों गुजरात आदि के पदधारकों ने भी बिहार से गाद नीति की जानकारी मांगी है।

गाद निकासी का फायदा क्या
● सरकार को भरोसा है कि जलस्रोतों से गाद की निकासी होने पर जलधारण क्षमता बढ़ेगी।

● सतही के साथ भू-जल में सुधार होगा। परंपरागत जलस्रोतों का पुनर्स्थापन आसान होगा।

जानिये, कहां-कहां होगा गाद का उपयोग
● एनएच, रेलवे, एसएच, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य, भवन निर्माण कार्य में भराई के लिए नदी, नहर व जलाशयों की मिट्टी का उपयोग हो सकेगा।

● गाद की मात्रा व निकासी के लिए अभियंता प्रमुख मुख्यालय की अध्यक्षता में कमेटी बनी।

● जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी समिति गाद की निकासी की प्रक्रिया पर नजर रखेगी।

नीति की क्यों पड़ी जरूरत
● राज्य की नदियों व जलाशयों में गाद के कारण पानी भंडारण क्षमता लगातार कम होती जा रही है।

● इससे साल-दर-साल बिहार की नदियों और जलाशयों में पानी संधारण क्षमता कम होती जा रही है।

● बाढ़ का फैलाव भी हो रहे हैं। इसे देखते हुए कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी।

क्या कहते हैं अधिकारी?
बिहार की गाद नीति को लेकर हर दिन विभिन्न राज्यों से जानकारी मांगी जा रही है। राज्य सरकार का यह बेहतर कदम है। अब गाद का वैज्ञानिक तौर पर प्रबंधन करने के लिए इसका अध्ययन किया जाना चाहिए। -राकेश कुमार, उपाध्यक्ष, इंडेफ।

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