नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास 7 लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित ऐतिहासिक 'रेस कोर्स मस्जिद' को लेकर विवाद मंगलवार को और गहरा गया। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, AAP नेता अमानतुल्लाह खान और कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने मस्जिद को खाली करने के लिए दिए गए 6 दिन के नोटिस पर चिंता जताई है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि वह इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देगी।
ओवैसी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 1977 से ही इस मस्जिद को एक गजटेड वक्फ संपत्ति माना गया है, तो दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इस आदेश को चुनौती क्यों नहीं दी? उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन ही नहीं हुआ है, जबकि बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते थे।

मीरवाइज ने भी की आलोचना
मीरवाइज ने भी मस्जिद खाली करने के लिए दी गई 6 दिन की समय-सीमा की आलोचना की। उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक बताया और मस्जिद का बचाव करने में वक्फ अधिकारियों की कथित विफलता पर सवाल उठाए। उन्होंने इस विवाद को वक्फ संशोधनों और मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण से जुड़ी व्यापक बहस से जोड़कर देखा।
दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने भी इस कार्रवाई पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद आजादी से पहले की है और नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) की अधिसूचित हेरिटेज लिस्ट में शामिल है। उन्होंने कहा कि वह खुद मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे।
दिल्ली हाईकोर्ट तक जाएगा मामला
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने का कहना है कि मस्जिद खाली करने के नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। इससे पहले भी इस मामले को चुनौती देने की कोशिश की गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता के सही पक्ष नहीं होने के कारण उसे खारिज कर दिया गया था। इस बार AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शोएब जमाई मस्जिद समिति की ओर से याचिका दायर कर सकते हैं।
'दिल्ली वक्फ बोर्ड से नहीं मिली मदद'
मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून ने बताया कि उन्होंने पिछले छह महीनों में कई बार दिल्ली वक्फ बोर्ड से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया है कि बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई है। सोमवार को जमीयत के एक प्रतिनिधिमंडल ने रिजिजू से मुलाकात की और बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल करने, नमाजियों के लिए मस्जिद तक पहुंच सुनिश्चित करने और मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान की सुरक्षा की मांग की।
क्या है विवाद?
आपको बता दें कि मुख्य विवाद उस जमीन को लेकर है जिस पर मस्जिद बनी है। भूमि और विकास कार्यालय द्वारा जारी बेदखली का नोटिस केवल मस्जिद तक सीमित नहीं है। इसका असर पास की एक झुग्गी बस्ती पर भी पड़ रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को इस बस्ती में रहने वाले लगभग 700 परिवारों को वहां से हटाने और उन्हें लगभग 45 किमी दूर स्थित सरकारी पुनर्वास कॉलोनी सावदा घेवरा में भेजने की अनुमति दी है। अधिकारियों को पुनर्वास स्थल पर शिक्षा, परिवहन और स्वच्छता जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
आपको बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इस जगह को खाली करने के लिए दिया गया छह सप्ताह का समय 6 अक्टूबर को समाप्त हो गया।
