रायपुर
बर्न, कटे-फटे होंठ, तालू और क्लब फुट से पीडि़त बच्चों एवं मरीजों का रायपुर के कालड़ा हॉस्पिटल में होगा निःशुल्क उपचार
छत्तीसगढ़ में बच्चों को स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य प्रदान करने की दिशा में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के अम्बिकापुर में आयोजित विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं सर्जरी चिन्हांकन शिविर में जन्मजात विकारों एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीडि़त 48 बच्चों एवं मरीजों को निःशुल्क उपचार और आवश्यक सर्जरी के लिए चिन्हांकित किया गया है। इन मरीजों को रायपुर स्थित कालड़ा बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों को रायपुर तक पहुंचाने के लिए आवश्यक परिवहन व्यवस्था भी की जाएगी।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एस. सरुता के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके/चिरायु) के अंतर्गत जिला मुख्यालय अम्बिकापुर स्थित 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। स्वास्थ्य विभाग सरगुजा और कालड़ा बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल रायपुर के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस शिविर में विकासखंड स्तर पर चिरायु दलों द्वारा पहले से चिन्हांकित बच्चों एवं मरीजों का विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। शिविर का उद्देश्य जन्मजात विकारों और अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे जरूरतमंद बच्चों एवं मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से जोड़ना तथा उन्हें निःशुल्क उपचार एवं सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराना है।
बर्न के 8, कटे-फटे होंठ के 18, तालू के 12 और क्लब फुट के 10 मरीज चिन्हांकित
शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा कुल 48 मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं सर्जरी के लिए चिन्हांकित किया गया। इनमें बर्न से संबंधित समस्याओं के 8 मरीज, जन्मजात कटे-फटे होंठ के 18, कटे-फटे तालू के 12 तथा क्लब फुट के 10 मरीज शामिल हैं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद इन मरीजों को रायपुर स्थित कालड़ा बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल में आवश्यक उपचार एवं सर्जरी उपलब्ध कराने के संबंध में सहमति प्राप्त की गई। अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक एवं प्लास्टिक सर्जन डॉ. दीपक ठाकुर ने मरीजों की जांच कर उनकी स्वास्थ्य समस्याओं के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया।
जन्मजात कटे-फटे होंठ और तालू जैसी समस्याओं के कारण बच्चों को भोजन करने, बोलने तथा सामान्य जीवन की गतिविधियों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं क्लब फुट जैसी जन्मजात समस्या से बच्चों के चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप और आवश्यक सर्जरी से ऐसी समस्याओं में सुधार संभव है। शिविर के माध्यम से चिन्हांकित मरीजों को विशेषज्ञ उपचार से जोड़ने की पहल उनके बेहतर स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक पहुंच रही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम ने कहा कि ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों एवं मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.सी. आर्या ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों में जन्मजात विकारों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराना आवश्यक है। सिविल सर्जन डॉ. जे.के. रेलवानी ने जरूरतमंद मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा एवं सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
कालड़ा हॉस्पिटल के विशेषज्ञ प्लास्टिक सर्जन डॉ. दीपक ठाकुर ने बताया कि बर्न, कटे-फटे होंठ, तालू और क्लब फुट जैसी समस्याओं का समय पर उपचार मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उचित चिकित्सकीय देखभाल और आवश्यक सर्जरी से मरीजों की शारीरिक कार्यक्षमता एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलती है।
चिरायु कार्यक्रम से जन्मजात विकारों की शीघ्र पहचान और उपचार पर विशेष जोर
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकासात्मक समस्याओं की शीघ्र पहचान कर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा जाता है। चिरायु दलों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच तथा जरूरत के अनुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों में उपचार की व्यवस्था की जाती है। अम्बिकापुर में आयोजित शिविर इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे 48 जरूरतमंद मरीजों को विशेषज्ञ उपचार एवं आवश्यक सर्जरी का अवसर मिलेगा।
शिविर में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम, संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.सी. आर्या, सिविल सर्जन डॉ. जे.के. रेलवानी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विमलचंद पैकरा, प्रोफेसर डॉ. अविनाशी कुजूर, डॉ. अभिजीत दीवान, नोडल नर्सिंग डॉ. पी.के. सिन्हा, नोडल आरबीएसके डॉ. के.पी. विश्वकर्मा, डॉ. कांत चौहान, डॉ. दीपक गुप्ता,
