नई दिल्ली
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकें कर रहा है। इन बैठकों में न्यूनतम बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैक्टर, सालाना इंक्रीमेंट, भत्तों और पेंशन में बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसी बीच दो प्रमुख कर्मचारी संगठनों, NC-JCM (National Council-Joint Consultative Machinery) और BPMS (Bharatiya Pratiraksha Mazdoor Sangh) ने अपनी मांगें रखी हैं। इनमें न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹69,000 से ₹72,000 तक करने के प्रस्ताव शामिल हैं।
सैलरी ₹69,000 और फिटमेंट 3.833 की डिमांड
NC-JCM ने 8वें वेतन आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 करने और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को 3.833 रखने की डिमांड की है। संगठन मौजूदा 3% सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6% करने का भी प्रस्ताव दे रहा है। इसके अलावा वेतन मैट्रिक्स में बदलाव और कुछ पे लेवल को आपस में मिलाने की डिमांड भी शामिल है। संगठन ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए पोषण संबंधी जरूरतों को आधार बनाने का सुझाव दिया है। इसमें भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) से जुड़ी 3,490 कैलोरी की जरूरत का उल्लेख किया गया है, खासकर शारीरिक मेहनत वाले कामों के लिए।
बेसिक सैलरी ₹72,000 और फिटमेंट 4 का प्रस्ताव
दूसरी ओर BPMS ने न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹72,000 और फिटमेंट फैक्टर 4 करने का प्रस्ताव रखा है। संगठन भी सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने के पक्ष में है। इसके साथ ही उसने न्यूनतम वेतन तय करने के तरीके में बदलाव की मांग की है। BPMS चाहता है कि वेतन निर्धारण में प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि को भी ध्यान में रखा जाए। संगठन के ज्ञापन के मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय 2016-17 में ₹1,03,219 से बढ़कर 2024-25 में ₹1,92,774 हो गई। संगठन ने इस वृद्धि को अपनी मांग के समर्थन में पेश किया है। उसने वेतन गणना में परिवार के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर 5 मानने का भी सुझाव दिया है।

फिटमेंट फैक्टर क्यों है अहम?
यह वह मल्टीपायर है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करके नई बेसिक सैलरी तय करने में किया जाता है। इसलिए कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्च को ध्यान में रखते हुए इसे तय किया जाए। हालांकि, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी की कुल सैलरी भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वास्तविक वेतन में बदलाव DA, HRA और अन्य भत्तों तथा अंतिम वेतन संरचना पर भी निर्भर करेगा।
आयोग की अपकमिंग बैठकों में भी इन मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर 2026 तथा मुंबई में 22 और 23 अक्टूबर को बैठकें होनी हैं। इन परामर्श बैठकों का उद्देश्य अलग-अलग वर्गों की मांगों और सुझावों को समझना है। इसके बाद आयोग उपलब्ध आंकड़ों और प्रस्तावों का आकलन करेगा।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ₹69,000 या ₹72,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी और 3.833 या 4 के फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की मांगें अभी कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव हैं, अंतिम फैसला नहीं। वास्तविक वेतन वृद्धि आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए, कर्मचारियों को इन प्रस्तावित आंकड़ों को संभावित मांग के रूप में देखना चाहिए, न कि तय होने वाली सैलरी के रूप में।
