Headlines

छत्तीसगढ़ में सेवा का नया मॉडल: कागजी उलझनों से राहत, सुविधाएं पहुंचेंगी घर तक

​विशेष लेख

​"सेवा_संकल्प_अभियान"

​कागजी उलझनों से मुक्ति—छत्तीसगढ़ में सेवा का संकल्प पहुँचा आपके द्वार

रायपुर

​छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में वर्षों से किसानों तथा भू-स्वामियों के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा कागजी दफ्तरों के चक्कर काटने और प्रशासनिक उलझनों से जूझने में बीत जाता था। नामांतरण की एक छोटी-सी अर्जी हो, जमीन का सटीक सीमांकन, प्राकृतिक आपदा के समय फसल बीमा का क्लेम हासिल करना हो या फिर कृषि विकास के लिए बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन लेना हो—हर छोटे-बड़े काम के लिए तहसील, राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और पटवारी कार्यालयों के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते थे। इस पूरी जटिल प्रक्रिया के दौरान बिचौलियों का अनुचित हस्तक्षेप, अतिरिक्त आर्थिक बोझ और पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद की निरंतर बनी रहने वाली चिंता ग्रामीण जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी।

​प्रशासनिक पहल: आधुनिक तकनीक से आई सुशासन की नई क्रांति

         ​लेकिन जब प्रदेश प्रशासन ने "सेवा का संकल्प, सेवा पहुँची आपके द्वार" के मूलमंत्र को अपनी कार्यशैली में आत्मसात किया, तो छत्तीसगढ़ के राजस्व प्रशासन के इतिहास में एक युगपरिवर्तकारी क्रांति की शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत प्रशासनिक सोच में आमूलचूल बदलाव लाया गया। अब किसान या भूमि स्वामी को अपनी वाजिब मांगों और भूमि संबंधी सुधारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रही, बल्कि शासन का अमला खुद आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक जीपीएस उपकरणों और दक्ष सर्वेयरों की समर्पित टीम लेकर ग्रामीणों के सीधे दरवाजे तक पहुँचा। इस पहल ने न केवल शासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाया, बल्कि सुशासन और पारदर्शिता की एक नई मिसाल भी कायम की।

​डिजिटल सर्वेक्षण का विशाल दायरा और अभूतपूर्व उपलब्धियाँ

          ​प्रशासन के इस दृढ संकल्प और सुनियोजित क्रियान्वयन का ही सुखद नतीजा है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 राजस्व ग्रामों में से 19,805 ग्रामों (लगभग 96.37%) में विस्तृत डिजिटल सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। मैदानी क्षेत्रों के प्रमुख जिलों जैसे रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर में डिजिटल सर्वे का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।

       ​दूसरी ओर, बस्तर संभाग के अत्यंत दुर्गम, वनांचल और संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे नारायणपुर, सुकमा तथा बीजापुर—में भी अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों और हाई-प्रिसिजन जीपीएस तकनीक के जरिए शेष बचे गाँवों को मानचित्र पर सटीक रूप से दर्ज करने का काम युद्ध स्तर पर निरंतर जारी है।

​भू-स्वामियों को मिले प्रमुख ऐतिहासिक लाभ

        ​प्रशासनिक दक्षता और जन-कल्याण की इस अनुपम पहल से प्रदेश के लाखों भू-स्वामियों को दशकों पुरानी असुविधाओं से स्थायी मुक्ति मिल चुकी है। डिजिटल नक्शों और सटीक सीमांकन के कारण ग्रामीण अंचलों में वर्षों से चले आ रहे भूमि संबंधी आपसी विवादों तथा कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अद्यतित और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड्स से पूरी राजस्व प्रणाली विश्वसनीय बनी है, जिससे दलालों और बिचौलियों का एकाधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया है।
       ​पूर्णतः त्रुटिरहित और सुधारे गए राजस्व रिकॉर्ड्स के आधार पर अब बैंक किसानों को बिना किसी अनावश्यक देरी के कृषि ऋण स्वीकृत कर रहे हैं। इसके साथ ही, किसान न्याय योजना, आपदा राहत और फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी कटौती के सीधा और समय पर वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है।

​आत्मनिर्भरता और आदर्श राज्य की ओर सुदृढ़ कदम

        ​शत-प्रतिशत डिजिटल, पारदर्शी और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला देश का आदर्श राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा बढ़ाया गया यह ऐतिहासिक कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व संबल प्रदान कर रहा है। "सेवा संकल्प अभियान" ने यह साबित कर दिया है कि जब दृढ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मिलन होता है, तो "सेवा पहुँची आपके द्वार" का संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर बदलती व्यवस्था की एक जीवंत और सुखद सच्चाई बन जाता है।

विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *