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सिर्फ 2 करोड़ के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने मचाया तहलका, 160 करोड़ के पार पहुंची कमाई

बॉक्स ऑफिस पर आए दिन नए-नए रिकॉर्ड बनते और टूटते रहते हैं, लेकिन जब कोई बिना किसी शोर-शराबे और तामझाम के आई फिल्म इतिहास रच दे, तो हर कोई हैरान रह जाता है. आध्यात्मिक गुरु नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' इन दिनों देशभर के सिनेमाघरों में धूम मचा रही है. 7 अगस्त को बिना किसी बड़े प्रचार-प्रसार के रिलीज हुई इस धार्मिक फिल्म ने उत्तर और पश्चिम भारत के दर्शकों को खींचकर थिएटर्स तक ला खड़ा किया है.

जहां एक ओर यश की बड़े बजट वाली फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी, वहीं महज 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी 'हनुमान अंश' ने 160 करोड़ रुपये से ज्यादा का शानदार कारोबार कर लिया है. अब सवाल ये उठता है कि फिल्म इंडस्ट्री से बाहर के लोगों और बाबा के भक्तों द्वारा बनाई गई यह छोटी सी फिल्म आखिर लोगों के दिलों को इतना कैसे छू रही है, क्या इसके पीछे कोई चमत्कार है या कोई और कारण?

नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म
विशाल चतुर्वेदी के लेखन और निर्देशन में बनी यह फिल्म लक्ष्मी नारायण शर्मा, जिन्हें दुनिया नीम करौली बाबा के नाम से जानती है, के जीवन को बेहद सादगी के साथ प्रस्तुत करती है. फिल्म दर्शकों को उनके बचपन के दिनों में ले जाती है, जब मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने ध्यान लगाना और साधु का जीवन अपनाना शुरू कर दिया था. इसके बाद उनकी अध्यात्म यात्रा और भविष्य देखने की दिव्य शक्तियों से लेकर उनकी बढ़ती प्रसिद्धि तक के हर पहलू को बहुत सुंदर तरीके से दिखाया गया है.

फिल्म का मुख्य फोकस नीम करौली बाबा के जीवन की उन महत्वपूर्ण घटनाओं पर है, जो उनके चमत्कारों और आम लोगों के जीवन पर पड़े सकारात्मक प्रभाव से जुड़ी हैं. फिल्म कहीं से भी किसी संत की जीवनी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हुई नजर नहीं आती. मेकर्स का मकसद किसी बड़े तकनीकी सिनेमा से चौंकाना नहीं, बल्कि बाबा की महान शख्सियत से लोगों को रूबरू कराना है. ठीक बाबा की जिंदगी की तरह इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी भी इसकी सादगी ही है.

फिल्म के एक्टर का कमाल काम
फिल्म का मूल उद्देश्य दर्शकों को गुरु की शिक्षाओं और उनकी आध्यात्मिक शक्तियों का अहसास कराना है. मुख्य किरदार में नए कलाकार शोभिनव सत्या ने कमाल का काम किया है. उन्होंने एक ऐसे साधु का किरदार निभाया है जो हर मुश्किल, अपमान या कठिन परिस्थिति में भी मुस्कुराता रहता है. ठीक वैसे, जैसे रामायण में अरुण गोविल राम के किरदार में दिखाई दिए थे. बिना किसी दिखावे और सीधे-सादे अंदाज में बनी इस फिल्म को देखकर बाबा के पुराने भक्त तो खुश हो ही रहे हैं, साथ ही नए दर्शक भी उनके जीवन और विचारों से गहराई से जुड़ रहे हैं.

सिनेमा की दुनिया में एक अलग पहचान
रजनीश (ओशो) पर बनी अमेरिकी डॉक्यूमेंट्री 'वाइल्ड वाइल्ड कंट्री', वेब सीरीज 'आश्रम' या 'MSG: द मैसेंजर ऑफ गॉड' जैसी फिल्मों की भीड़ के बीच 'हनुमान अंश' एक बिल्कुल अलग एक्सपीरियंस देती है. यह किसी कमर्शियल सुपरहीरो की तरह मुख्य किरदार को महिमामंडित नहीं करती, बल्कि एक आम इंसान की अंदरूनी अच्छाई और मूल्यों पर भरोसा जताती है. यही वजह है कि एक साधारण जीवन जीने वाले संत की यह कहानी आज करोड़ों लोगों के दिलों में उतर चुकी है.

क्या सिनेमा जगत में शुरू होगा नया दौर?
फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता को देखकर अब यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में दूसरे आध्यात्मिक गुरुओं पर भी फिल्में बनाने का एक नया ट्रेंड शुरू होगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल देश का दर्शक नीम करौली बाबा की सादगी और शिक्षाओं के प्रभाव में पूरी तरह से लीन नजर आ रहा है.

खैर, ताज्जुब की बात तो यह है कि अपने पांचवें हफ्ते में ही फिल्म ने अकेले 55 करोड़ रुपये कमा डाले हैं, जो भारतीय सिनेमा में अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है. धार्मिक लोग इसे हनुमान जी का चमत्कार मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे इस तरह से भी देख रहे है कि हाल फिलहाल में रिलीज हुई फिल्मों का कंटेंट कमजोर है, ये ही वजह है कि दर्शक हनुमान अंश की तरफ पहुंचे. बाकी काम सोशल मीडिया के प्रचार-प्रसार, नेताओं-अभिनेताओं की तारीफों ने पूरा कर दिया.

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