Headlines

Vande Bharat का खास फीचर बचाता है बिजली, ब्रेक लगाते ही मोटर बन जाती है जनरेटर

 नई दिल्‍ली
वंदे भारत ट्रेन तेजी भारतीय रेलवे नेटवर्क में फैल रहा है. देश के ज्‍यादातर रूटों पर वंदे भारत ट्रेन चलाई जा रही है. आपने भी कभी ना कभी वंदे भारत एक्‍सप्रेस से सफर किया ही होगा या फिर उसकी बनावट या लग्‍जरी सुविधाओं के बारे में सुना या देखा ही होगा, लेकिन क्‍या आपको पता है कि इस ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्‍टम भी काफी कमाल का है। 

वंदे भारत ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्‍टम बिल्‍कुल कार की तरह ही काम करता है, जो ट्रेन में ही इस्‍तेमाल किए जाने वो ब्रेकिंग सिस्‍टम से पूरी तरह अलग है. इस सिस्‍टम में इलेक्ट्रो न्यूमेटिक (Electro Pneumatic) डिस्क ब्रेक लगाए जाते हैं. इसके ब्रेक पहियों के बगल में नहीं बल्कि साथ लगाए जाते हैं। 

बिजली के जरिए ही इसका ब्रेकिंग सिस्‍टम ट्रांसमिट होता है, जो काफी तेजी से काम करता है और ब्रेक लगाते ही इसका असर दिखने लगता है. यह ब्रेक सिस्‍टम ठीक वैसा ही है जैसे एक काम में होता है, जिसमें डिस्‍क और ड्रम ब्रेक लगे होते हैं. यही कारण है कि वंदे भारत ट्रेन बाकी ट्रेनों की तुलना में ज्‍यादा सुरक्षित है। 

इंमरजेंसी में कैसे ट्रेन को रोकता है ये सिस्‍टम? 
वंदे भारत ट्रेन में ऐसा सिस्‍टम होता है, जो इमरजेंसी में ट्रेन को आसानी से रो देता है. इसमें इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD) लगाया गया है जैसा की कार में भी होता है. यह सिस्‍टम हाईस्पीड ट्रेन को इमरजेंसी में बिना किसी परेशानी के रोका सकता है. इस सिस्‍टम का ट्रॉयल अगस्‍त में पूरा कर लिया गया है, जो बिना किसी नुकसान के ट्रेन को आसानी से रोक देगा. अभी इसे यात्री ट्रेनों में लागू नहीं किया गया है। 

बिजली बनाता है ये सिस्‍टम
जब ट्रेन तेज गति से चल रही होती है और ब्रेक लगाया जाता है, तो सामान्‍य ब्रेक में ट्रेन की गतिज ऊर्जा बर्बाद हो जाती है, लेकिन वंदे भारत में इलेक्ट्रिक मोटर को ब्रेकिंग के दौरान जनरेटर की तरह चलाया जा सकता है. ट्रेन के पहिए मोटर को घुमाते हैं और मोटर बिजली पैदा होती है. यह बिजली रेलवे के विद्युत सिस्टम में वापस भेजी जा सकती है या सिस्टम की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल होती है। 

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार ब्रेक लगाने पर उतनी ही बिजली वापस मिलती है. ऊर्जा की कुछ मात्रा मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सिस्‍टम में नुकसान के कारण प्रभावित होती है. एक अनुमान के हिसाब से इस तकनीक का प्रयोग करके कम से 30 फीसदी बिजली पैदा की जा सकती है। 

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *