Headlines

साल्बोनी जमीन मामले में अभिषेक के PA की मुश्किलें बढ़ीं, SC में कस्टडी की मांग

कोलकाता
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अब पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार (19 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट में उनके निजी सहायक (PA) सुमित रॉय को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की है। पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट को बताया कि अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय, साल्बोनी ज़मीन हड़पने के मामले में चल रही जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसलिए पुलिस को कस्टडी में लेकर पूछताछ करने की इजाजत दी जाए।

शीर्ष अदालत ने छह अगस्त को जमीन हड़पने के मामले में रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को सरकारी जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।

गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा वापस ले ली जाए
राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ से आग्रह किया कि रॉय को गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा वापस ले ली जाए क्योंकि वह कथित तौर पर पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं और सवालों से बच रहे हैं।

सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट
रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उनके मुवक्किल अदालत के निर्देश के अनुसार पुलिस के समक्ष पेश हो रहे हैं और संविधान उन्हें कुछ न कहने का अधिकार देता है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा, ''संविधान (जांच एजेंसी के) गिरफ्तारी के अधिकार को भी सुरक्षित करता है।'' सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को पुलिस द्वारा अब तक इकट्ठा की गई सामग्री भी सीलबंद लिफाफे में सौंपी। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पुलिस की सीलबंद लिफाफे में मिली रिपोर्ट देखने के बाद ही इस मामले की सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी अपने छह अगस्त के आदेश की अवधि अगले आदेश तक बढ़ा दी।

क्या है मामला?
यह मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। पीठ ने रॉय को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया था। अदालत ने आदेश में कहा था, ''उनके साथ कोई वकील या कोई अन्य व्यक्ति नहीं होना चाहिए। वह सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक किसी भी जांच के लिए उपलब्ध रहेंगे जिसमें उन्हें समय समय पर विराम भी मिलेगा। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी पर रोक बनी रहेगी।''

इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट में जस्टिस तीर्थंकर घोष की पीठ ने इस मामले में उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। रॉय के वकील ने दलील दी थी कि प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था और जांच के दौरान ही उनकी कथित संलिप्तता सामने आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केस राजनीति से प्रेरित है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *