चंडीगढ़.
चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर को विदेशों में नीलाम किए जाने के मामले में अब यूनेस्को के हस्तक्षेप से भारत की मुहिम को मजबूती मिली है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने शिकागो स्थित राइट डिजाइन ऑक्शन हाउस को पत्र भेजकर 13 अगस्त को नीलाम किए गए चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर के स्वामित्व हस्तांतरण पर रोक लगाने को कहा है।
यूनेस्को ने स्पष्ट किया है कि इन वस्तुओं के स्रोत और भारत से इनके निर्यात की वैधता की जांच पूरी होने तक इन्हें खरीदारों को हस्तांतरित न किया जाए। राइट डिजाइन ऑक्शन हाउस में चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर के आठ लॉट नीलामी के लिए रखे गए थे। इनमें छह लॉट की नीलामी हो चुकी है, जिनसे करीब 83 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। यूनेस्को ने सभी आठ लॉट के स्वामित्व हस्तांतरण को फिलहाल रोकने का आग्रह किया है। यूनेस्को की संस्कृति एवं आपातकालीन मामलों की निदेशक क्रिस्टा पिकाट ने राइट डिजाइन ऑक्शन हाउस के अध्यक्ष रिचर्ड राइट को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि भारत के अधिकारियों ने 13 अगस्त को यूनेस्को के समक्ष मामले को उठाते हुए नीलामी में शामिल वस्तुओं पर गंभीर आपत्ति जताई थी। भारत का कहना है कि ये वस्तुएं भारतीय कानून के तहत सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं और इन्हें देश से बाहर ले जाने में नियमों का उल्लंघन हुआ हो सकता है।

सीमा शुल्क कानून के उल्लंघन का दावा
भारत ने यूनेस्को को बताया है कि इन विरासत वस्तुओं के निर्यात में सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। यूनेस्को ने राइट ऑक्शन हाउस से नीलामी और वस्तुओं के स्रोत से संबंधित दस्तावेज भारतीय अधिकारियों को उपलब्ध कराने को भी कहा है। इसके साथ ही वस्तुओं के स्वामित्व और उनके अमेरिका पहुंचने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है।
यूनेस्को ने सांस्कृतिक संपत्ति के कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय नैतिक आचार संहिता और सांस्कृतिक संपत्ति के अवैध आयात, निर्यात व स्वामित्व हस्तांतरण को रोकने से संबंधित 1970 यूनेस्को कन्वेंशन का हवाला देते हुए कार्रवाई की है।
प्रशासन पहले ही उठा चुका है मामला
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से नीलामी से पहले ही केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के माध्यम से अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया गया था। प्रशासन की ओर से नीलामी रोकने और विदेशों में पहले बिक चुके विरासत फर्नीचर को वापस लाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
चंडीगढ़ पुलिस ने विरासत फर्नीचर की कथित चोरी और अवैध निर्यात के संबंध में एफआईआर भी दर्ज की है। यूनेस्को के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद है कि नीलाम हो चुके फर्नीचर का तत्काल हस्तांतरण रोका जा सकेगा। साथ ही, विदेशों में पहले नीलाम हो चुकी चंडीगढ़ की विरासत को वापस लाने के प्रयासों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है।
पहले भी करोड़ों में बिकती रही चंडीगढ़ की विरासत
चंडीगढ़ के निर्माण के दौरान ली ली कार्बुजिए, पियरे जेनरे और उनके सहयोगियों द्वारा डिजाइन किया गया फर्नीचर शहर की वास्तुकला और डिजाइन विरासत का अहम हिस्सा है। पिछले कई वर्षों से चंडीगढ़ का यह फर्नीचर फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों में नीलाम होता रहा है।
विदेशों में लगातार नीलामी: कुर्सियां, टेबल, स्टूल, डेस्क और कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाला अन्य फर्नीचर अंतरराष्ट्रीय नीलामी घरों में ऊंची कीमतों पर बिकता रहा है।
अमेरिका में बड़ी कीमत: अमेरिका के नीलामी घरों में चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर की कई वस्तुएं लाखों रुपये में बिकी हैं।
हालिया शिकागो नीलामी: 13 अगस्त 2026 को राइट डिजाइन ऑक्शन हाउस में चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर के आठ लॉट रखे गए। छह लॉट बिक चुके हैं और इनसे करीब 83 लाख रुपये मिले।
अब यूनेस्को का हस्तक्षेप: यूनेस्को ने नीलाम हो चुकी वस्तुओं के स्वामित्व हस्तांतरण पर रोक लगाने को कहा है। इससे चंडीगढ़ की विरासत को वापस लाने की मुहिम को नई उम्मीद मिली है।
सिर्फ फर्नीचर नहीं, शहर की पहचान: विरासत संरक्षण से जुड़े लोगों के अनुसार यह फर्नीचर सामान्य पुराना सामान नहीं है। यह चंडीगढ़ की आधुनिक वास्तुकला और शहर के निर्माण की कहानी से जुड़ी महत्वपूर्ण विरासत है।
