कानपुर
कानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो बैंकों में अपनी जमा पूंजी रखने वालों के लिए हैरान करने वाली है. शहर के स्वरूप नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा के लॉकर में रखे 50 लाख रुपए के जेवरात गायब मिले हैं. मामले में कानपुर पुलिस ने संबंधित बैंक कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है. यह बैंक लॉकर 2003 में खुला था. लेकिन लंबे समय तक उसे चेक नहीं किया गया था. चार महीने पहले ही जब इस लॉकर को चेक किया गया तो उसमें रखे जेवर गायब थे. जिससे कस्टमर हैरान रह गया. उसने तुरंत मामले की जानकारी पुलिस को दी तो मामले की जांच शुरू की गई।
2003 में SBI में खुलावाया था लॉकर
दरअसल, मामला कौशलपुरी की रहने वाली रश्मि अरोड़ा से जुड़ा है. उन्होंने साल 2003 में स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर में अपना खाता खुलवाया था. जिसका विलय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में हो गया था. महिला को बैंक ने लॉकर नंबर-23 मिला था. साल 2011 में पति के निधन के बाद महिला अपनी बेटी के पास लखनऊ शिफ्ट हो गईं. इस लंबे अंतराल के दौरान उनके बचत खाते से लॉकर का सालाना किराया नियमित रूप से कटता रहा, जिससे उन्हें भरोसा था कि उनके जीवनभर की जमा-पूंजी सुरक्षित है. करीब चार महीने पहले जब रश्मि बैंक पहुंचीं तो स्टाफ ने यह कहकर उन्हें चौंका दिया कि उनके नाम पर कोई लॉकर ही दर्ज नहीं है. काफी मिन्नतें करने और बैंक रिकॉर्ड खंगालने के बाद आखिरकार उनका लॉकर नंबर 23 मिला।
SBI बैंक लॉकर में नहीं थे जेवरात
27 जुलाई को जब रश्मि ने बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में लॉकर को खोला गया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. लॉकर के अंदर रखे 50 लाख के पुश्तैनी और कीमती आभूषण पूरी तरह गायब थे. ऐसे में महिला ने बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों पर साजिश के तहत जेवर हड़पने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. जहां कानपुर के पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर स्वरूपनगर पुलिस ने शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. पुलिस लॉकर से जुड़े रिकॉर्ड, बैंक के दस्तावेज और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
कैसे खुला बैंक लॉकर का ताला
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैंक लॉकर का ताला खुला कैसे होगा. क्योंकि रश्मि का कहना है कि 2011 के बाद पहली बार इस साल बैंक आई हैं. इसके बीच में उसने कभी लॉकर नहीं खुलवाया था. ऐसे में सवाल उठता है कि रश्मि की गैर-मौजूदगी में और बिना उनकी चाबी के यह लॉकर किसने और किसके आदेश पर खोला?

