पटना
बिहार में अपनी इच्छा से रक्तदान करने वाले लोगों के लिए स्मार्ट कार्ड आधारित डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली और अपडेट हो रही है।
अब पहली बार रक्तदान करने पर रक्तदाता को स्मार्ट कार्ड सीधे उसके वॉट्सएप पर उपलब्ध कराया जाएगा। उसके बाद प्रत्येक रक्तदान का डिजिटल रिकॉर्ड स्मार्ट कार्ड में अपडेट होता रहेगा।
इस व्यवस्था से रक्तदाताओं का अद्यतन रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे रक्त की शत प्रतिशत ट्रैकिंग होगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी।

विभागीय अधिकारियों ने शुक्रवार को स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सचिव डॉ. रवि को इससे अवगत कराया। बैठक में 20 महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा हुई।
सचिव ने निर्देश दिया कि स्टेट ड्रग कंट्रोलर की अनुमति या अनापत्ति प्रमाण-पत्र के बिना कोई भी ब्लड बैंक संचालित नहीं होगा। ब्लड बैंकों का नियमित निरीक्षण हो।
पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस का जिन जिन ब्लड बैंकों ने जवाब नहीं दिया है, उनके विरुद्ध कार्रवाई हो। आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस निलंबित किया जाए।
उन्होंने पीएमसीएच में पीपीपी माडल पर केमिलुमिनेसेंस एनालाइजर लगाने का निर्देश दिया। यह उपकरण जांच के दौरान निकलने वाले प्रकाश (केमिलुमिनेसेंस) को मापकर रक्त के नमूने में मौजूद पदार्थों की मात्रा का पता लगाता है।
खून की दर का होगा पुनर्निधारण
बैठक में तय हुआ कि ब्लड एवं ब्लड कंपोनेंट्स (प्लेटलेट्स, प्लाज्मा एवं आरबीसी आदि) के प्रोसेसिंग चार्ज नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) की नई गाइड-लाइन के अनुरूप निर्धारित किए जाएंगे। इससे अस्पतालों में मरीजों को रियायती एवं न्यूनतम दर पर रक्त मिलेगा। इसके साथ ही सरकारी और निजी ब्लड बैंकों के बीच समन्वय पारदर्शी होगा।
खून में पांच संक्रमण की जांच
ब्लड सेंटरों में एकत्रित रक्त को मरीजों को उपलब्ध कराने से पहले पांच प्रमुख संक्रमण (एचआईवी-1, एचआईवी-2, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, मलेरिया तथा सिफिलिस) की जांच होती है।
अभी अधिसंख्य ब्लड सेंटरों में एचआइवी, हेपेटाइटिस-बी एवं हेपेटाइटिस-सी की जांच एलिसा पद्धति से तथा मलेरिया एवं सिफिलिस की जांच रैपिड कार्ड पद्धति से होती है।
